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Wednesday, 27 November 2019

  98 year old Undergoes Successful Angioplasty at Metro Hospital Faridabad

98 year old Undergoes Successful Angioplasty at Metro Hospital Faridabad

FARIDABAD 28 NOVEMBER : Cardiac team at a Metro Hospital Faridabad has given a new lease of life to a 98 year old heart patient with multiple health conditions. Mr. Dewan came into the emergency department with complaints of severe pain in the left side of the chest and sweating. Patient is a known case of right sided kidney tumor, for which his ureter was removed surgically and patient had taken chemotherapy. 

Initial investigations showed acute heart attack which is a life threatening condition which occur when blood flow to the heart muscle is cut off due to blockage of heart artery, causing tissue damage. This is usually the result of a blockage in one or more of the coronary arteries. In lieu of acute MI, patient underwent angiography by Dr. Neeraj Jain, Sr. Interventional Cardiologist & Medical Director of the hospital which revealed a critical block in the LAD artery which supply major part of heart.

Angioplasty stenting carries risk in patient as he can go into kidney failure, but it was his only chance of survival. After explaining the family about the risk involve and the procedure, consent was taken and Mr. Dewan underwent coronary angioplasty to LAD artery successfully, using single drug coated stent. Patient was stable after the procedure and got discharged in a stable condition. 

Dr. Neeraj Jain, said that considering patient’s old age and multiple health conditions, it was a challenging case, a small delay in opening the vessel would have been proved fatal.” He further added “patients at this age can do quite well after angioplasty, providing they are appropriate candidate and treating doctor is well experienced to handle such complex cases," said Dr. Neeraj Jain. Generally elderly patients ignore their sufferings and feared undergoing heart procedures. But that is just a myth, angioplasty is safe option and is lifesaving procedure.” Dr. Jain added.

Dr. Jainendra Khash, CCU Head said patient responded well to the treatment and was very happy at the time of discharge. He said, it is important for all of us to go for regular heart checkup after 30 yrs as it help in the prevention of heart diseases.

It’s a myth that angioplasty is not safe in old patients. We do lots of angioplasty procedure in more than 80 yrs old patients. Dr. S.S Bansal, Sr. Interventional Cardiologist & Managing Director of the hospital said. We are doing such complex procedures on regular basis. Our hospital is known for its comprehensive heart care by highly skilled cardiac team. We have kept the high standards of care which is the keystone of our success and all equipment’s are of best in the world to provide 100% safety to our patients” He further added. 

फोर्टिस एस्कॉर्ट्स के डॉक्टरों ने महिला के पेट से 5 किग्रा ट्यूमर निकाला : डॉ. बी डी पाठक

फोर्टिस एस्कॉर्ट्स के डॉक्टरों ने महिला के पेट से 5 किग्रा ट्यूमर निकाला : डॉ. बी डी पाठक

फरीदाबाद, 28 नवंबर, 2019: फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल के डॉक्टरों की टीम ने हाल में,  लैप्रोस्कोपिक तकनीक की मदद से 22 वर्षीय युवती के पेट से 5 किग्रा वज़न का एक ट्यूमर सफलतापूर्वक निकाला। टीम का नेतृत्व डॉ. बी डी पाठक, निदेशक-जीआई, मिनीमली इनवैसिव एंड बेरियाट्रिक सर्जरी और डॉ. वी एस चौहान, वरिष्ठ सलाहकार-जीआई, मिनीमली इनवैसिव एंड बेरियाट्रिक सर्जरी, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, फरीदाबाद ने किया।

मरीज़ सरिता को सांस लेने में मुश्किल हो रही थी और ठीक से भोजन भी नहीं कर पा रही थी। जब उन्हें अस्‍पताल लाया गया तो पेट में परेशानी हो रही थी और सांस लेने में भी तकलीफ थी। जरूरी जांच कराने के बाद उनके पेट में करीब 5 किग्रा का ट्यूमर पाया गया। उपचार के विभिन्न विकल्पों का मूल्यांकन करने के बाद डॉक्टरों ने परिवार को एडवांस लैप्रोस्कोपिक एक्सट्रैक्शन कराने की सलाह दी क्योंकि इसके बाद सर्जरी का कोई निशान भी नहीं रहता और सुधार में लंबा समय भी नहीं लगता है। प्रक्रिया पूरी होने के दो दिनों में मरीज की तबियत में सुधार हो गया और पूरी तरह ठीक हो जाने पर उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया।

डॉ. बी डी पाठक, निदेशक-जीआई, मिनीमली इनवैसिव एंड बेरियाट्रिक सर्जरी, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, फरीदाबाद ने कहा, “इस तरह की सर्जरी के लिए बड़ा कट लगाने की ज़रूरत होती है लेकिन यह मरीज़ बहुत युवा थीं। उनके सामने उनकी पूरी ज़िंदगी पड़ी हुई थी। इसलिए हम ने लैप्रोस्कोपिक तकनीक का इस्तेमाल कर छोटे कट के साथ बड़े ट्यूमर को निकाला गया। मुझे खुशी है कि टीम ने यह सफलतापूर्वक किया। इसलिए जब भी ऐसे मरीज आते हैं तो हम हमेशा ही मरीज़ों के सर्वश्रेष्ठ संभव सुधार के लिए सर्जरी का सर्वश्रेष्ठ विकल्प तलाशते हैं।”

श्री मोहित सिंह, फेसिलिटी निदेशक, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, फरीदाबाद ने कहा, “फोर्टिस में हम प्रत्येक मामले में सर्वश्रेष्ठ परिणाम हासिल करने के लिए सर्वश्रेष्ठ क्लिनिकल परिदृश्य की ओर ध्यान केंद्रित करते हैं। यह मामला सर्वश्रेष्ठ उपयोग के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके सर्वश्रेष्ठ परिणाम हासिल करने का है। ऊपर बताया गया मामला बहुत ही जटिल होता है जिसे हमारे डॉक्टरों की टीम ने सफलतापूर्वक पूरा किया जिससे मरीज को सर्वश्रेष्ठ परिणाम मिला और उनकी तबियत में तेज़ी से सुधार हुआ।”    

Thursday, 8 August 2019

एशियन बना क्षेत्र का पहला अस्पताल जिसे मिली ब्रेन डेथ किडनी ट्रांसप्लांट की अनुमति

एशियन बना क्षेत्र का पहला अस्पताल जिसे मिली ब्रेन डेथ किडनी ट्रांसप्लांट की अनुमति

 फरीदाबाद  8 अगस्त 2019 - एशियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज अस्पताल को पीजीआई  रोहतक ने ब्रेन डेड यानि जिन लोगों का दिमाग मृत घोषित कर दिया जाता है ऐसे लोगों के परिवार जन  की आज्ञा से किडनी ट्रांसप्लांट करने की अनुमति दे दी गई है I

 एशियन अस्पताल में मरीज को ब्रेन डेड  घोषित करने के लिए एक कमिटी तैयार की जाएगी I व्यक्ति को ब्रेन स्ट्रोक या एक्सीडेंट की स्थिति में यह कमिटी दिमागी टेस्ट करके उससे ब्रेन डेड घोषित करेगी I इस कमिटी में अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट, आई सी यु हेड, न्यूरोलॉजिस्ट, फिजिशियन, एनेस्थीसिया और जनरल सर्जन शामिल होंगे I 

ब्रेन डेड घोषित करने के बाद उसके परिवार जनो से अनुमति ली जाएगी, उनकी अनुमति पर अस्पताल उस व्यक्ति की किडनी किसी और मरीज (जिसकी किडनी फेल हो चुकी है ) उसे ट्रांसप्लांट कर सकता हैI 
जिले का कोई भी अस्पताल सरकारी या गैर सरकारी ब्रेन डेड व्यक्ति की जानकारी एशियन अस्पताल को दे सकता है, जानकारी मिलने के बाद एशियन अस्पताल की कमिटी  की टीम के डॉक्टर परिवार की अनुमति मिलने पर उनकी किडनी दान करा सकते हैं I 

क्या है ब्रेन डेड ?
ब्रेन डेथ एक ऐसे स्तिथि हैं जिसमे व्यक्ति का दिमाग काम करना बंद कर देता है लेकिन उसके शरीर के बाकी अंग सुचारु रूप से काम कर रहे होते हैं जिसे आम भाषा में कोमा की स्तिथि  कहा जाता है I

Wednesday, 7 August 2019

मानसून में रखें साफ-सफाई का ध्यान : डॉ. राम चंद्र सोनी

मानसून में रखें साफ-सफाई का ध्यान : डॉ. राम चंद्र सोनी

फरीदाबाद : 8 अगस्त I  बारिश का झमाझम मौसम और पकौड़ों का स्वाद मन को खुशी तो देता है, लेकिन खान-पान के प्रति बरती जाने वाली लापरवाही कई बार गंभीर रूप धारण कर लेती है। बरसात का मौसम एक ओर तो गर्मी से निजात दिलाता है, लेकिन दूसरी ओर बीमारियों को पनपने का मौका भी देता है। बरसात के दिनों में वायरल इंफेक्शन आम बात है। इस मौसम में पेट से संबंधित बीमारियों के फैलने का भय बना रहता है। डॉ. राम सोनी ने बताया कि उनके पास पीलिया के मरीज भी बाद गए है रोज़ाना 3 -4 मरीज पीलिया के आ रहे हैं

एशियन अस्पताल के एचओडी गैस्ट्रोइंटेरोलॉजी डॉ. राम चंद्र सोनी का कहना है कि मानसून में पेट दर्द की समस्या आम बात है। उल्टी-दस्त, पेट दर्द आदि की समस्या को लेकर अस्पताल में आने वाले मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। इस मौसम में पेट से संबंधित बीमारियां ज्यादा होती है। इन बीमारियों के लक्षण भी कई प्रकार के होते हैं पेट में दर्द होना, उल्टी होना, बदन दर्द और कमर दर्द। डॉक्टर का कहना है कि इस मौसम में बैक्टीरिया ज्यादा प्रभावित होता है और संक्रमण फैलाता है। बाहर का खाना, तला हुुआ, बासी भोजन का सेवन करना, खुले में रखे भोजन का सेवन करने से  भी बीमारियों को फैलने का मौका मिलता है। इस प्रकार का खाना खाने के २४ घंटे के भीतर बीमारियों के लक्षण उभरने लगते हैं।

डॉ. सोनी का कहना है कि अगर हम स्वयं साफ-सफाई की ओर ज्यादा ध्यान दें तो बीमारियों से बचाव किया जा सकता है। फिल्टर्ड और उबला हुआ पानी पीना चाहिए। बासी या खुले में रखा खाना नहीं खाना चाहिए। फल व सब्जियों को धोकर खाना चाहिए। जंक फूड के सेवन से बचना चाहिए। तले व मसालेदार खाने के सेवन से बचना चाहिए। बार-बार हाथ धोने चाहिएं। संतुलित भोजन का सेवन करना चाहिए। 

डॉ. सोनी के अनुसार मानसून हेपेटाइटिस ए और ई के वायरस को प्रभावित करता है। इस बीमारी का प्रमुख कारण दूषित पानी है। खान-पान की लापरवाही लिवर को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है।  इसके लक्षणों के पाए जाने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करके जांच करानी चाहिए। ताकि समय रहते बीमारी का पता लगाकर उचित इलाज किया जा सके। इसके अलावा इस रोग से बचने के लिए साफ-सफाई की ओर विशेष ध्यान देना चाहिए।

Sunday, 28 July 2019

 मेट्रो हॉस्पिटल मैं विश्व हेपेटाइटिस दिवस मनाया गया : डॉ विशाल खुराना

मेट्रो हॉस्पिटल मैं विश्व हेपेटाइटिस दिवस मनाया गया : डॉ विशाल खुराना

फरीदाबाद, 28 जुलाई। इस विश्व हेपेटाइटिस दिवस (28 जुलाई] 2019) के उपलक्ष में मेट्रो अस्पताल के वरिष्ठ पेट एवं लिवर रोग विशेषज्ञ डॉ विशाल खुराना बता रहे हैं हपेटाइिटस के बारे में । 

हेपेटाइटिस क्या है हेपेटाइटिस जिगर, लीवर, यकृत की सूजन है] जो आमतौर पर वायरल संक्रमण के कारण होता है, जो जिगर में सूजन का कारण होता है। जिगर की सूजन के कई कारण हैं जैसे की - वायरल संक्रमण, दवा के दुष्प्रभाव, अत्यधिक शराब का सेवन, इत्यादि। हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी और ई पांच मुख्य हेपेटाइटिस वायरस हैं। ऎकयुट और क्रोनिक हेपेटाइटिस के दो प्रकार होते हैं। ऎकयुट हेपेटाइटिस तब होता है जब यह छह महीने से कम समय तक रहता है] जबकि क्रोनिक हेपेटाइटिस तब होता है जब  हेपेटाइटिस लंबे समय तक बनी रहती है। 

क्या वायरल हेपेटाइटिस एक महत्वपूर्ण समस्या है%
वायरल हेपेटाइटिस के साथ रहने वाले केवल 11% लोग अपनी स्थिति से अवगत हैं। वायरल हेपेटाइटिस विश्व स्तर पर मौत का एक प्रमुख कारण है। हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी वायरस दुनिया में सबसे अधिक (80%) लीवर कैंसर के मामलों में होता है। 
नेशनल सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल ( एनसीडीसी ) द्वारा भारत में हेपेटाइटिस बी 3-4% लोगों में पाया जाता है और हेपेटाइटिस सी 1% मे। पंजाब और हरियाणा के कुछ क्षेत्रों में हेपेटाइटिस काफी अधिक पाया जाता है। भारत में] हेपेटाइटिस ई वायरस (HEV) वयस्कों के हेपेटाइटिस का सबसे महत्वपूर्ण कारण हैI हेपेटाइटिस ए वायरस (HAV) बच्चों में आम है। 

हपेटाइिटस के लक्षण क्या है%
हेपेटाइटिस में हो सकता है कि कोई लक्षण न हो] लेकिन अक्सर ये पीलिया, आहार (भूख) की कमी और अस्वस्थता के साथ प्रस्तुत होता है। बुखार, शरीर में दर्द] थकान] कमजोरी] पेट में दर्द] उलटी] कम भूख का लगना] गहरे रगं का मूत्र और पीली रगं की आँखे होना यह तीव्र हेपेटाइटिस (एक्यूट हेपेटाइटिस) की निशानी माने जाते हैंI बीमारी बढ़ जाने पर पीलीया, पेट का बढ़ना] खून की उल्टी] काले या लाल रगं का मल] असामान्य व्यव्हार] कम भूख का लगना एवं वजन का घटना आदि लक्षण पाये जाते है ।

हेपेटाइटिस संक्रमण के कारण और निवारण%

हेपेटाइटिस के प्रकार कारण निवारण
हेपेटाइटिस ए (HAV) दूषित भोजन खाने या प्रदूषित जल पीने से 1.स्वस्थ और पौष्टिक भोजन खाएं
2.स्वच्छ और सुरक्षित पानी पीना 3.हेपेटाइटिस ऐ टीकाकरण उपलब्ध है
हेपेटाइटिस ई (HEV) दूषित भोजन खाने या प्रदूषित जल पीने से 1.स्वस्थ और पौष्टिक भोजन खाएं
2.स्वच्छ और सुरक्षित पानी पीना 
हेपेटाइटिस बी  (HBV) 1. संक्रमित व्यक्ति के रक्त या अन्य शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क के माध्यम से
2. गर्भावस्था के दौरान संक्रमित मां को बच्चे को 1.आपको गर्भावस्था के दौरान अपना परीक्षण करना चाहिए
2.संक्रमित व्यक्ति के साथ टूथब्रश, रेजर या नाखून कैंची और सुइयों साझा करने से बचें 
3. बिना लाइसेंस वाले सुविधाओं से टैटू या शरीर के छेदों को नहीं करना चाहिए
4. हेपेटाइटिस बी टीकाकरण उपलब्ध है
हेपेटाइटिस सी (HCV) 1. संक्रमित रक्त और सुइयों
2. यह कुछ यौन प्रथाओं के माध्यम से प्रेषित भी किया जा सकता है जहां रक्त शामिल है। 1. संक्रमित व्यक्ति के साथ टूथब्रश, रेजर या नाखून कैंची और सुइयों साझा करने से बचें 
2. बिना लाइसेंस वाले सुविधाओं से टैटू या शरीर के छेदों को नहीं करना चाहिए


हेपेटाइटिस बी संक्रमण रोकने में टीकाकरण बहुत प्रभावी है। हपेटाइिटस बी का टीका 3 बार ( 0, 1 और 6 माह के अंतराल पर ) दिया जाता है जो की 95% तक वायरस से लड़ने में  कारगर साबित होता है। यदि आपको टीका लगाया नहीं गया है] तो टीकाकरण करवाएं] कंडोम का उपयोग करें] और संक्रमित व्यक्ति के साथ टूथब्रश] रेज़र] नाख़ून कैंची या सुई को साझा करने से बचें। आपको बिना लाइसेंस वाले सुविधाओं से टैटू या शरीर के छेदों को नहीं करना चाहिए। यदि आपको लगता है कि आपको भविष्य में संक्रमित होने की संभावना है] तो टीकाकरण होना आवश्यक है। हेपेटाइटिस बी संक्रमित मां से पैदा होने वाले बच्चे को 12 घंटे के भीतर टीका लगाया जाना चाहिए, क्योंकि यह एक संक्रमण को रोक सकता है जो क्रोनिक हेपेटाइटिस बी में बदलने की संभावना रखता है।

उपचार%
हेपेटाइटिस ए और ई: हेपेटाइटिस ए और ई आमतौर पर तीव्र/ ऎकयुट (acute) हेपेटाइटिस का कारण बनता है जिससे शरीर अक्सर कुछ हफ्तों के भीतर ही संक्रमण को साफ कर सकता है। हालांकि, संक्रमण कभी&कभी आगे की जटिलताओं का कारण बन सकता है। हे हेपेटाइटिस ए और ई के लिए अलग से कोई दवाई नहीं है। उपचार मुख्य रूप से लक्षणों के आधार पर होता है

हेपेटाइटिस बी: हमारे पास दवाएं] जैसे पेगेंटरफेरॉन इंजेक्शन और एंटीवायरल (एनटेकवीर / टेनोफॉवीर) गोलियां, उपलब्द हैं। ये दवाएं वायरस की प्रतिकृति को धीमा कर देती हैं और कभी-कभी इसका निष्कासन कर देती है। सबसे महत्वपूर्ण बात है कि यह दवाएं जटिलताओं के जोखिम को बहुत कम करती हैं जो हेपेटाइटिस बी के कारण हो सकता है जैसे लिवर सिरोसिस और लिवर कैंसर।

हेपेटाइटस सी: दवाईयां हेपेटाइटिस सी संक्रमण का इलाज कर सकता है। पहले इसका इलाज इंजेक्शन से ही होता था लेकिन आजकल एंटीवायरल ड्रग्स (सोफोसबुवीर / लीडिपैसवीर / डाक्लाट्सविर / वेलपात्सिर) उपलब्ध हैं जो की खाई जा सकती हैं। 

हेपेटाइटिस में जिगर की क्षति को रोकने के लिए टिप्स:

ऐसा करें ऐसा न करें
हेपेटाइटिस के लिए टीकाकरण शराब, तंबाकू और ड्रग्स से बचें
बहुत सारे तरल पदार्थ पीयें और हाइड्रेटेड रहें खाना जो आप बर्दाश्त नहीं कर सकते उस से बचें
प्रयाप्त कैलोरी/भोजन का सेवन बनाए रखें तनाव से बचें



आईएमए फरीदाबाद ने फ्रूट और ऑर्नामेंटल के पौधे लगाए : डॉ  पुनीता हसीजा प्रधान

आईएमए फरीदाबाद ने फ्रूट और ऑर्नामेंटल के पौधे लगाए : डॉ पुनीता हसीजा प्रधान

फरीदाबाद, 28 जुलाई।  आई एम ए फरीदाबाद ने अपना हरित क्रांति का अभियान जारी रखते हुए दूसरे चरण में आज सुबह मेट्रो हॉस्पिटल के प्रांगण में वृक्षारोपण किया , आईएमए की प्रधान डॉक्टर पुनीता हसीजा ने बताया की आई एम ए ने पूरे फरीदाबाद मैं 100 पौधे लगाए और फ्रूट और ऑर्नामेंटल के लगाए और कहा कि जितने ज्यादा पौधे लगाए जायेगे उतनी हम बीमारियों से बचे गए और प्रदूषण से बचाव होगा I  

विपुल गोयल यहां पर मुख्य अतिथि थे । सभी डॉक्टर्स  ने मिलकर कई सारे पौधे लगाए। डॉ एसएस बंसल व डॉ सीमा बंसल का इस कार्यक्रम में विशेष योगदान रहा ।आईएमए की प्रधान डॉक्टर पुनीता हसीजा ,पूर्व प्रधान डॉक्टर सुरेश अरोड़ा ,डॉ भारती गुप्ता, डॉ राजीव जैन ,डॉ हर्ष नंदिनी ,डॉक्टर संगीता,डॉक्टर मनीषा, डॉक्टर सोनल गोयल, डॉ अरविंद ,डॉक्टर आभा,  डॉ रमा मंगला, डॉक्टर सतीश मंग्ला ,डॉ अशोक चांदना, डाक्टर अशोक चावला, डॉ अशोक ग्रोवर ,डॉ अमित ग्रोवर मुख्य रूप से उपस्थित थे ।

Saturday, 6 July 2019

मैट्रो अस्पताल फरीदाबाद ने न्यूरोइलेक्ट्रोफिजियोलोजी (मस्तिष्क जाँच लैब) यूनिट को बनाया और अधिक अत्याधुनिक

मैट्रो अस्पताल फरीदाबाद ने न्यूरोइलेक्ट्रोफिजियोलोजी (मस्तिष्क जाँच लैब) यूनिट को बनाया और अधिक अत्याधुनिक

फरीदाबाद 6 जुलाई : मैट्रो अस्पताल फरीदाबाद में न्यूरोइलेक्ट्रोफिजियोलोजी (मस्तिष्क जाँच लैब) यूनिट को और अधिक अत्याधुनिक बनाया गया है। यूनिट का उद्घाटन अस्पताल के सीनियर कार्डियोलोजिस्ट एवं मैनेजिंग डायरेक्टर डा.एस.एस बंसल, स्त्री रोग विशेषज्ञ एवं डायरेक्टर डा. सीमा बंसल, डा नीरज जैन सीनियर कार्डियोलोजिस्ट एवं मेडिकल डायरेक्टर, सीनियर विशेषज्ञ एवं एच.ओ.डी. मस्तिष्क रोग विभाग डा. सुषमा शर्मा एवं मस्तिष्क रोग विशेषज्ञ डा. पांडुरंगा एम.एस. ने किया। इस मौके पर डा एस.एस. बंसल ने कहा कि हम हमेशा अपने मरीजों को बेहतर चिकित्सा सेवा देने के लिए अस्पताल को अत्याधुनिक एवं नवीनतम तकनीकी संसाधनों से लैस करने की दिशा में अग्रसर है। हमारे पास मस्तिष्क रोग विशेषज्ञों की बेहतरीन टीम है जो मरीजों को प्राथमिक उपचार के साथ ही गंभीर परिस्थितियों में भी बेहतर स्वास्थ्य सेवायें देने के लिए कार्यरत है।



नई न्यूरोइलेक्ट्रोफिजियोलोजी (मस्तिष्क जाँच लैब) यूनिट में वीडियो ई.ई.जी.,(वीडियो टेलीमेटरी सुविधा), ई.एम.जी., एन.सी.वी. एवं इवोक पोटेसिंयल जोकि मिर्गी, न्यूरोपैथी, नसों की बीमारियों जैसी अनेको बीमारियों के निदान एवं उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

अस्पताल की सीनियर विशेषज्ञ एवं एच.ओ.डी. मस्तिष्क रोग विभाग डा. सुषमा शर्मा ने बताया कि मैट्रो अस्पताल अंतराष्ट्रीय मानकों एवं तकनीक के द्वारा रोगी की पुरानी से पुरानी मस्तिष्क रोग से जुड़ी बीमारियों को पहचान कर उनका निदान करता है। इन बीमारियों में प्रमुखतः लकवा (स्ट्रोक), मिर्गी दौरे, एन्सेफैलोपैथिस (भ्रम की स्थिति), ज्यादा दिन तक आई.सी.यू. में रहने पर रोगियों में मस्तिष्क संबंधी समस्याएं, मस्तिष्क में सूजन, हाथ-पैर में कंपन होना आदि। कुशल विशेषज्ञों, नवीनतम तकनीक, अत्याधुनिक उपकरण एवं 100 बैड युक्त आईसी.यू. हमारे इस मस्तिष्क विभाग को सर्वश्रेष्ठ बनाती है। हम हमेशा अपने मरीजों कोे सस्ती मेडिकल सुविधायें अंतराष्ट्रीय मानक पर प्रदान करते है। हमारी इस न्यूरोइलेक्ट्रोफिजियोलोजी (मस्तिष्क जाँच लैब) यूनिट में कुछ महत्वपूर्ण सुविधायें है जैसे कि -

ई.ई.जी.:-  यह एक नाॅन-इनवेसिव जाँच है जिसका उपयोग मस्तिष्क की इलैक्ट्रीकल प्रक्रिया का पता लगाने और रिकार्ड करने के लिए किया जाता है। इसका उपयोग मिर्गी, मस्तिष्क ट्यूमर और भ्रम की स्थिति जैसे मस्तिष्क विकारों के निदान के लिये किया जाता है। भ्रम की स्थिति के रोगी यदि लंबे समय से बीमार है इसका कारण पता करने के लिए यह बेहद उपयोगी है। 

एन.सी.वी:- यह उपकरण हमारी माँसपेशियों में इलैक्ट्रीकल वेग मापने और रिकार्ड करने के लिए होता है इससे हमारी नसों में आवेग कितनी तेजी से बढ़ता है और उससे कितनी क्षति पहुँची है का पता चलता है।

ई.एम.जी.:- ई.एम.जी. परीक्षण हमारी मांसपेशियों के माध्यम से आगे बढ़ने वाले इलैक्ट्रीकल संकेतो को रिकार्ड करता है। यह किसी भी बीमारी की उपस्थिति, स्थान और सीमा को पता लगाने में मदद करता है जिसके कारण हमारी तंत्रिकाओं और माँसपेशियों को नुकसान पहुँचा है। 

वीडियो टेलीमेट्री:- यह परीक्षण विभिन्न प्रकार के दौरे के उपचार के निदान और योजना बनाने में बेहद उपयोगी होता है।

उपरोक्त उपकरणों के अलावा हमारे पास मस्तिष्क रोगियों के इलाज के लिए सी.टी. स्कैनर, एम.आई.आई और 3डी कैथ लैब भी है जो विभिन्न न्यूरोलाॅजिकल विकारों के इलाज और निगरानी में महत्वूपर्ण भूमिका निभागती है।

Saturday, 18 May 2019

डॉ. ओपी भल्ला फाउंडेशन की ओर से लगाए जाने वाले फ्री हेल्थ कैंप संपन्न

डॉ. ओपी भल्ला फाउंडेशन की ओर से लगाए जाने वाले फ्री हेल्थ कैंप संपन्न

फरीदाबाद, 18 मई:  डॉ. ओपी भल्ला फाउंडेशन की ओर से सालाना लगाए जाने वाले हेल्थ कैंप्स संपन्न हुए। मार्च में शुरू हुए कैंप्स आज फरीदाबाद के गोठड़ा मोहब्बताबाद गांव में संपन्न हुए। आज 50 लोगों ने अपनी मुफ्त जांच करवाई।

फाउंडेशन की ओर से 10 फ्री हेल्थ कैंप लगाए गए जिनमें फरीदाबाद के अलग-अलग गांव, कालोनी और स्कूल शामिल रहे। कैंप्स में मानसिक स्वास्थ्य, पोषण और डायटेटिक्स,  दंत स्वास्थ्य, के बारे में मरीजों को जानकारी दी गई और मुफ्त में जांच भी की गई। इस बार 1500 से ज्यादा लोगों ने इसका लाभ उठाया।

आपको बता दें, तीन महीने तक चलने के बाद फिलहाल यह फ्री हेल्थ कैंप्स संपन्न हो गए हैं, लेकिन फाउंडेशन इस तरह के कैंप्स समय-समय पर आयोजित करता रहता है। 

Friday, 17 May 2019

Dr.Kasana - Expert homeopathic Doctor In Delhi

Dr.Kasana - Expert homeopathic Doctor In Delhi

डॉ.अभिषेक कसाना एम . डी  होम्योपैथी - एक प्रसिद्ध होम्योपैथ, एक प्रसिद्ध शिक्षाविद और प्रसिद्ध अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक, होम्योपैथी में उनके बड़ेयोगदान के लिए जाने जाते हैं। 

 एलर्जी, अस्थमा, राइनाइटिस, टॉन्सिलिटिस, साइनोसाइटिस, एडेनोइड्स, गठिया, स्पॉन्डिलाइटिस, बीपीएच- प्रोस्टेट,लिचेन, मौसा, सोरायसिस, रोसैसिया, एक्ने, हर्ज़ल, एक्जिमा, मोलस्कैम, यूरेटिसारिया, यूरेट्रिकेरिया, जैसे विभिन्न विकारों के उपचार में उनकीविशेषज्ञता। , बांझपन, इरेक्टाइल डिसफंक्शन, शीघ्रपतन, अवसाद, पार्किंसंस रोग, माइग्रेन, और अंतःस्रावी विकार जैसे मधुमेह आदि से संबंधित रोगउल्लेखनीय हैं।

 उन्होंने अपने 20 वर्षों के नैदानिक अभ्यास में कई रोगियों का सफलतापूर्वक इलाज किया है और भारत में अग्रणी होम्योपैथों में से एकहै। उन्होंने विभिन्न देशों में अब तक असंख्य अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार और कार्यशालाएं दी हैं और होम्योपैथी की गहन समझ और होम्योपैथी के आयामों से परेजाकर गहन कार्यक्रम बनाने के लिए एक संगठन की स्थापना की है।
वह होम्योपैथी और फाइंडिंग बेस्ट होम्योपैथिक मेडिसिन, क्लासिकल होम्योपैथी - होम्योपैथी में इसकी व्याख्या और व्यावहारिक अनुप्रयोग - के बारेमें अवधारणाओं और उपन्यास विचारों के लिए प्रसिद्ध है।

 मामलों को सुलझाने में उनके व्यावहारिक दृष्टिकोण ने उन्हें भारत और विदेशों में प्रशंसा औरप्रसिद्धि दिलाई है।
उनकी सफलता की कहानियों में से एक:
वह अपने मामलों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण और बड़ी दक्षता के साथ हल करता है। यहां एक ऐसे मामले का उदाहरण दिया गया है जो उन्होंने मलेशिया मेंअंतर्राष्ट्रीय सेमिनार में प्रस्तुत किया था।
 एक पुरुष, जिसकी उम्र ५ ९ वर्ष है, वह पिछले ५ वर्षों से पतला और मधुमेह रोगी है।

 उनकी अन्य शिकायतों मेंबार-
बार पेशाब आना, सोरायसिस, पुरानी एसिडिटी, थायरॉयड, ऑस्टियोआर्थराइटिस और ब्रोंकाइटिस थे। रक्त की रिपोर्ट निम्नानुसार थी: उपवासरक्त शर्करा:
 190 मिलीग्राम / डीएल, पोस्ट प्रांडियल रक्त शर्करा: 223 मिलीग्राम / डीएल।

सज्जन एक चतुर व्यक्ति था, वह सभी के साथ पार था, किसी की बात नहीं मानता था, आहार प्रतिबंध या किसी भी अभ्यास का पालन नहीं करता था।
वह बहुत व्यंग्यात्मक और अक्सर अपमानजनक था, उसकी एक तेज जीभ थी।

 उनके व्यंग्यात्मक, तीखे व्यवहार और लक्षणों की अन्य समग्रता केआधार पर, उन्हें एसिड फॉस 0/1 निर्धारित किया गया था और 2-
3 साल की अवधि में इस मामले में सोरायसिस, थायराइड, रक्त रिपोर्ट सहित सभीस्तरों पर सुधार देखा गया था।

कृपया ध्यान दें कि होम्योपैथी दवा पूरी तरह से एक विशेषज्ञ डॉक्टर द्वारा लेने और विश्लेषण के बाद निर्धारित की जाती है। स्व दवा उचित नहीं है औरहानिकारक साबित हो सकती है।

डॉ कसाना एक बेहद सफल होम्योपैथ और होम्योपैथी की उन्नति के लिए एक महान योगदानकर्ता हैं। वह ऑरा होमियोपैथी इंडिया में एक विशेषज्ञपैनल डॉक्टर हैं, जो एक ऑनलाइन होम्योपैथिक स्वास्थ्य पोर्टल है जो लोगों की सेवा करने और उन्हें होम्योपैथी के साथ उनकी बीमारियों से राहतदिलाने का काम करता है।

 ऑरा होम्योपैथी इंडिया में सर्वश्रेष्ठ होम्योपैथिक डॉक्टरों का एक पैनल है जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित हैं और उनकेकई वर्षों के सफल नैदानिक अनुभव हैं।

डॉ.अभिषेक कसाना एम. डी  होमियोपैथी) और ऐसे कई विशेषज्ञ होम्योपैथ्स ऑफ़ इंटरनैशनल रीप्यूट से परामर्श करने के लिए हमें 9873537001पर कॉल करे या Homeopathic Doctor In Delhi पर लॉग इन करे I 


Tuesday, 14 May 2019

Homeopathic Doctor In Faridabad For Hairloss Alopecia Areata : Dr. Abhishek Kasana

Homeopathic Doctor In Faridabad For Hairloss Alopecia Areata : Dr. Abhishek Kasana


Homeopathic Doctor In Faridabad For Hairloss Alopecia Areata

डॉ.अभिषेक कसाना M.D होम्योपैथी (Homeopathic Doctor In Faridabad)

एलोपेशिया आरैटा सलाह देता है: -एएस डॉ। अभिषेक के अनुसार, होम्योपैथिक उपचार के लिए सख्त व्यक्तिगतकरण की आवश्यकता होती है। अपने होम्योपैथिक डॉक्टर की सलाह के बिना कोई दवा न लें।

एलोपेशिया एरियाटा हेयर लोस
  • कारण,
  • लक्षण,
  • उपचार,
  • होम्योपैथी दवा और
  • खालित्य areata के होम्योपैथिक उपचार।
एलोपेशिया एरेटा को गंजे क्षेत्रों को बनाने वाले गोल पैच में अचानक बालों के झड़ने की विशेषता है। यह एक अत्यधिक अप्रत्याशित त्वचा रोग है जो खोपड़ी और शरीर के अन्य हिस्सों पर हो सकता है।

अन्य ऑटोइम्यून विकारों के साथ कुछ समानताओं के कारण, यह सुझाव दिया जाता है कि एलोपेसिया अरीता एक ऑटोइम्यून बीमारी है। बालों का झड़ना आमतौर पर खोपड़ी पर गंजापन के एक या अधिक छोटे, गोल, चिकने पैच से शुरू होता है जो खोपड़ी पर कुल बालों के झड़ने में प्रगति कर सकता है।

एलोपेशिया आरैटा का विभेदक निदान
  • तिन्या कैपिटास
  • कर्षण द्वारा खालित्य
  • खालित्य जन्मजात
  • एनाफिलेक्टिक द्वारा प्रेरित रासायनिक ट्राइकोटिलोमेनिया
  • इफ्लुवियम एलोपेसिया
  • Trichodystrophies
  • ल्यूपस एरिथेमेटोसस
  • Pseudopelade
  • काई
  • planopilaris
  • बुलर स्क्लेरोडर्मा
  • पेम्फिगॉइड
  • उपदंश
  • फॉलिकुलिटिस अलोपेसिया
  • नियोप्लास्टिक कूपिक श्लेष्मा
एलोपेसिया अरेटा जेनेटिक ग्रैनुलोमैटस विकारों की पूर्वसूचना एटियलजि - परिवार के इतिहास में ऑटोइम्यून रोग के साथ सहयोग की संभावना बढ़ जाती है - (थायराइड रोग, एडिसन रोग, विटिलिगो) एक ऑटोइम्यून उत्पत्ति का सुझाव देता है; एनाजोन हेयर फॉलिकल में और उसके आसपास लिम्फोसाइटिक घुसपैठ की उपस्थिति अतिरिक्त प्रमाण है। एलोपेसिया अरीटा अन्य ऑटोइम्यून बीमारियों से अलग है, जिसके परिणामस्वरूप लक्ष्य अंग के कार्य का पूर्ण नुकसान नहीं होता है, लेकिन बाल कूप की गतिविधि के एक अस्थायी परिवर्तन में, जो सामान्य में वापस आ सकता है। इससे पता चलता है कि लक्ष्य वृद्धि कारक या उसके रिसेप्टर को नियंत्रित कर सकता है।

कारण

सूक्ष्मजीव, तंत्रिकाजन्य उत्तेजना, भावनात्मक तनाव और खराब मैथुन कौशल की पहचान संभावित कारणों या ट्रिगर के रूप में की गई है।

एलोपेशिया आरैटा क्लिनिकल प्रेजेंटेशन के लक्षण और लक्षण बालों के झड़ने के छोटे-छोटे गोल पैच से लेकर क्रॉनिक लॉस तक भिन्न होते हैं, स्कैल्प, भौंहों, पलकों, नाक, दाढ़ी और शरीर के बालों की कुल नॉनसर्किंग, स्पॉन्टेनियस रिमिशन देख सकते हैं।

खालित्य Areata मनोवैज्ञानिक रूप से दर्दनाक हो सकता है। एक अज्ञात ट्रिगर के कारण हेयर फॉलिकल एनाजेन, डायस्ट्रोफिक एनाजेन हेयर, कैटजेन या हेयर टेलोजेन चरण बदलते हैं।

नाखून का डंक लग सकता है। अन्य ऑटोइम्यून बीमारियों जैसे कि हाशिमोटो के थायरॉयडिटिस और विटिलिगो के साथ संबंध की एक उच्च घटना बताई गई है।

खालित्य आर्यता के मामले में अनुसंधान विस्तृत इतिहास और शारीरिक परीक्षण नैदानिक उद्देश्यों के लिए महत्वपूर्ण उपकरण हैं; अंग विशिष्ट एंटीबॉडी का प्रदर्शन किया जा सकता है। किसी अन्य विकार को बाहर करने के लिए स्कैल्प बायोप्सी उपयोगी हो सकती है।

एलोपेशिया आरैटा का उपचार इस स्थिति के लिए उपचार के विकल्पों की एक किस्म उपलब्ध है, यदि छोटे बालों के झड़ने की पहचान पैच, यह बेहतर है कि प्रतीक्षा करें और बालों को अपने आप वापस बढ़ने दें। अन्य उपचार विकल्पों में मुख्य रूप से शामिल हैं: मजबूत सामयिक स्टेरॉयड के आवेदन, एक स्टेरॉयड का इंजेक्शन, मिनोक्सिडिल का उपयोग बालों के विकास को बढ़ावा देने के लिए किया गया है और कुछ मामलों में स्वभाव परिणाम दिखाया गया है।

बालों के विकास को प्रोत्साहित करने के लिए, बालों के झड़ने की साइट पर एक संपर्क जिल्द की सूजन, या जलन पैदा करने के लिए एक अन्य प्रकार का उपचार तैयार किया गया है। इन मामलों में रिलैप्स के साथ फोटो कीमोथेरेपी भी टेंपररी परिणाम दे सकती है।

अलोपेसिया अरेटा का आभा होम्योपैथिक उपचार: - होम्योपैथी चिकित्सा की सबसे लोकप्रिय समग्र प्रणालियों में से एक है। डॉ.अभिषेक कसाना एम। डी। आभा होम्योपैथी के अनुसार, होम्योपैथी एलोपेसिया अरीटा और अन्य ऑटिइम्यून रोगों के लिए सर्वश्रेष्ठ उपचार प्रदान करती है। एलोपेशिया आरैटा के लिए सर्वश्रेष्ठ होम्योपैथिक दवा का चयन एक समग्र दृष्टिकोण के उपयोग के माध्यम से वैयक्तिकरण के सिद्धांत और लक्षणों की समानता पर आधारित है। यह एकमात्र तरीका है जिसके माध्यम से आप उन सभी संकेतों और लक्षणों को दूर कर सकते हैं जो रोगी पूर्ण स्वास्थ्य की स्थिति से पीड़ित हैं। होम्योपैथी का लक्ष्य न केवल एलोपेसिया आरिएटा के उपचार के लिए है, बल्कि इसके अंतर्निहित कारण और व्यक्तिगत संवेदनशीलता को संबोधित करना है। उपचारात्मक दवाओं के संबंध में, खालित्य areata के उपचार के लिए कई उपचार उपलब्ध हैं जिन्हें दावों के कारण, संवेदनाओं और तौर-तरीकों के आधार पर चुना जा सकता है। व्यक्तिगत उपाय और उपचार के चयन के लिए, रोगी को अपने पास के सर्वश्रेष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए, या साइबर क्लिनिक की नियुक्ति का विकल्प चुनना चाहिए।


Alopecia areata के लिए कुछ सर्वश्रेष्ठ होम्योपैथिक दवा:

  • फेरम फॉस - एनीमिया के कारण सिर से बालों का झड़ना
  • एसिडम का आटा - बुजुर्गों की खालित्य या समय से पहले उम्र के साथ उपदंश, पैच में बालों का झड़ना, टाइफाइड बुखार के कारण बालों का गिरना
  • सीपिया - गर्भावस्था के दौरान बालों का झड़ना, दाद जैसे क्षेत्रों में, रूसी खोपड़ी की गंधक सल्फर - स्तनपान कराने वाली महिलाओं में बाल गिरते हैं, जब अच्छी तरह से चयनित दवाएं राहत देने में विफल रहती हैं।
  • सेलेनियम मिले - सिर, भौहें, पलकें और शरीर के अन्य हिस्से से बालों का झड़ना
  • नैट्रम म्यूर - बच्चे के जन्म के बाद बालों का झड़ना, एक बच्चे को उसके नर्सिंग से, पुराने सिरदर्द के बाद बालों का झड़ना
  • Mancinella - एक गंभीर तीव्र बीमारी के बाद बालों का झड़ना 
  • Vinca मामूली - बालों का झड़ना, मजबूत और अच्छी तरह से परिभाषित, परिचालित पैच जो नरम खोपड़ी को छोड़ देते हैं और सफेद या भूरे बाल सफेद ऊन जैसे गंजे क्षेत्रों में बढ़ सकते हैं।
  • फोस एसिड - एलोपेशिया आरैटा के लिए उल्लेखनीय उपाय, बालों का झड़ना एक गंभीर बीमारी के बाद गिरता है, बाल झड़ते हैं, भौंहें और पलकें गिरती हैं
  • लच्छी दाढ़ी के बाल झड़ते हैं - बाल झड़ते हैं
  • कार्बो वेग - गर्भावस्था के दौरान बाल गिरना

हमारे अन्य लेख बताते हैं कि होम्योपैथी के साथ इसका इलाज कैसे किया जाता है और एलोपेसिया अरीता के लिए सर्वश्रेष्ठ संकेतित होम्योपैथिक उपचार नीचे दिए गए हैं।


आभा होम्योपैथिक मेडिकल फाउंडेशन, फरीदाबाद, दिल्ली- NCR, भारत 31 अप्रैल 2018 और 17 अगस्त, 2018

© होम्योपैथिक मेडिकल फाउंडेशन ऑरा। सर्वाधिकार सुरक्षित।

ई-मेल: aurahomoeopathy@gmail.com

एलोपेशिया आरैटा सलाह देता है: -एएस डॉ। अभिषेक के अनुसार, होम्योपैथिक उपचार के लिए सख्त व्यक्तिगतकरण की आवश्यकता होती है। अपने होम्योपैथिक डॉक्टर की सलाह के बिना कोई दवा न लें।

Tuesday, 30 April 2019

मैट्रो अस्पताल के डाक्टरों ने जटिल सर्जरी करके निकाला दिल तक पहुंचा गुर्दे का कैंसर

मैट्रो अस्पताल के डाक्टरों ने जटिल सर्जरी करके निकाला दिल तक पहुंचा गुर्दे का कैंसर

फरीदाबाद, 30 अप्रैल। मैट्रो अस्पताल के अनुभवी डाक्टरों की टीम ने चिकित्सा क्षेत्र में एक और कीर्तिमान स्थापित करते हुए इराकी मरीज के दिल तक पहुंचे गुर्दे के कैंसर को जटिल सर्जरी करके निकालने में सफलता हासिल की है। 49 वर्षीय इराकी मरीज अहमद (बदला हुआ नाम) को थकान और शरीर दर्द की जांच के दौरान इराक में पता चला कि उसे दांये गुर्दे का कैंसर है, जो कि खून की नली में से फैलता हुआ हृदय के दांये भाग तक फैल गया है। सुविधाओं एवं तकनीकी ज्ञान के अभाव में मरीज ईलाज के लिए भारत आया और यहां फरीदाबाद के सेक्टर-16ए स्थित मैट्रो अस्पताल पहुंचा।

 वहां उन्होंने वरिष्ठ यूरोलोजिस्ट एवं यूरो ओंकोलोजिस्ट डा. राजीव सेतिया को दिखाया। डा. राजीव सेतिया ने विस्तृत में पुन: जांच की और मरीज को इस बीमारी की गंभीरता के बारे में समझाया तथा आप्रेशन की सलाह दी। उन्होंने मरीज को बताया कि मैट्रो अस्पताल फरीदाबाद में सभी प्रकार के जटिल आप्रेशन किए जाते है। उन्होंने मरीज को विश्वास दिलाया कि आपकी सर्जरी भी सफलतापूर्वक कर दी जायेगी। मरीज ने दिल्ली एनसीआर के कई बड़े अस्पतालों में परामर्श करने के बाद मैट्रो अस्पताल फरीदाबाद में ही आप्रेशन करवाने का निर्णय लिया। 

7 घण्टे चले इस जटिल आप्रेशन में मैट्रो अस्पताल के यूरोलोजिस्ट डा. राजीव सेतिया, कार्डियोथौरोसिक सर्जन एस.एस. सिद्धू, लीवर सर्जन डा. शेलेंद्र लालवानी की एक टीम बनाकर इस सर्जरी को सफलतापूर्वक किया गया। डा. राजीव सेतिया ने बताया कि गुर्दे का कैंसर जो शरीर की सबसे बड़ी खून की नली (आईवीसी) से होते हुए दिल तक फैला हो उसे लेवल 4 कैंसर कहते है। उन्होंने यह भी बताया कि आमतौर पर इस तरह के ट्यूमर को हटाने के लिए मरीज को कार्डियोपलमोनरी बाईपास मशीन तक लेटाया जाता है, जबकि इस मामले में कार्डियोप्लायमेंटरी बायपास के बजाए वेनो-वेनस बाईपास तकनीक को अपनाया और बहुत ही कम निर्धारित समय में गुर्दे का ट्यूमर खून की नली से निकाल कर उसे रिपेयर कर दिया गया, जिससे कार्डियोपलमोनरी (सीपीबी) के दुष्प्रभाव से बचा जा सका। डा. सिद्धू ने बताया कि वेनो-वेनस बाईपास के रिजल्ट्स बहुत अच्छे होते है, इससे मरीज की तेजी से रिकवरी होती है और अत्यधिक रक्तस्त्राव भी नहीं होता है। 

वहीं अस्पताल के मैनेजिंग डायरेक्टर डा. एस.एस. बंसल ने इस जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक करने पर डा. राजीव सेतिया एवं डा. एस.एस. सिद्धू को बधाई देते हुए कहा कि यह गर्व की बात है कि ऐसे जटिल ट्यूमर सर्जरी को उत्कृष्ट परिणामों के साथ किया गया। उन्होंने कहा कि मैट्रो अस्पताल चिकित्सा क्षेत्र में निंरतर प्रगति की ओर अग्रसर हो रहा है और लोगों को एक ही छत के नीचे आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करवाने का जो लक्ष्य है, उसे वह पूरी कत्र्तव्यनिष्ठा से निभाकर लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवा रहे है।

Saturday, 30 March 2019

सुधा रुस्तगी कालेज आफ डेंटल साईसिज एण्ड रिसर्च फरीदाबाद,ओरल सर्जरी का आयोजन

सुधा रुस्तगी कालेज आफ डेंटल साईसिज एण्ड रिसर्च फरीदाबाद,ओरल सर्जरी का आयोजन

फरीदाबाद 30 मार्च । दिल्ली एनसीआर राज्य (एओएमएसआई) के अध्याय तथा सुधा रुस्तगी कालेज आफ डेंटल साईसिज एण्ड रिसर्च फरीदाबाद,  सुधा रुस्तगी कालेज आफ डेंटल साईसिज एण्ड रिसर्च फरीदाबाद, फरीदाबाद में एक सेमीनार का आयोजन किया गया।

इस सेमीनार में डॉ आशीष गुप्ता और डॉ. पंकज बंसल के मार्गदर्शन में 28 से 31 मार्च तक कॉलेज कैंपस में छात्रों के एमडीएस परीक्षा के लिए मैक्सिलोफेशियल सर्जरी में मास्टर क्लास का आयोजन किया गया और उन्हे तकनीकि जानकारी भी दी।  इस अवसर पर संस्थान के अध्यक्ष श्री धर्मवीर गुप्ता और सचिव श्री दीपक गुप्ता ने भी शिरकत की।

इस कार्यक्रम का उद्घाटन डॉ.सी एम मढिया प्रिंसिपल, डॉ.विशाल जुनेजा सीईओ, डॉ.गुरकीरत सिंह वाइस प्रिंसिपल द्वारा किया गया।

डा. आशीष गुप्ता ने बताया कि इस सेमीनार के आयोजन मुख्य उद्देश्य छात्रों को उनकी एमडीएस परीक्षा के लिए तैयार करना है। 

लगभग 45 राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय प्रवक्ता और 1०० प्रतिनिधियों ने  इस कार्यक्रम में भाग लिया। जिसमें विभिन्न अनुभवी प्रशिक्षकों ने अपने अनुभव से निम्नलिखित विषयों के बारे में छात्रों को शिक्षित किया। जिसमें मुख्य रूप से  मौखिक कैंसर, ट्यूमर, मौखिक इन्फेक्शन, इंप्लांट्स और जबड़े पुनर्निर्माण आदि मुख्य थे। 




Thursday, 21 March 2019

Finding Best Homeopathic Doctor In Faridabad For Migraine Headache( मिग्रेन-सिरदर्द के लिए बेस्ट होम्योपैथिक दवा )

Finding Best Homeopathic Doctor In Faridabad For Migraine Headache( मिग्रेन-सिरदर्द के लिए बेस्ट होम्योपैथिक दवा )

फरीदाबाद : 22 मार्च I आप के पास फरीदाबाद में सर्वश्रेष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक इस लेख में मैं शास्त्रीय होम्योपैथी दृष्टिकोण के साथ माइग्रेन-सिरदर्द के इलाज के लिए Aura होम्योपैथी में अपने नैदानिक अनुभव को साझा करना चाहूंगा। यद्यपि कई स्रोत रिपोर्ट करते हैं कि माइग्रेन ठीक नहीं किया जा सकता है और हम केवल उनके लक्षणों को कम कर सकते हैं, मैं अपने स्वयं के अनुभव से कह सकता हूं कि माइग्रेन का सिरदर्द ठीक है और माइग्रेन प्रतिक्रिया होम्योपैथिक उपचार के लिए सर्वश्रेष्ठ है।

होम्योपैथी सबसे आम "गैर-माइग्रेन" सिरदर्द को भी ठीक कर सकती है यदि वे प्राथमिक हैं, किसी अन्य गंभीर विकृति का परिणाम नहीं है।

माइग्रेन एक विशेष सिरदर्द है जो ज्यादातर एक तरफा होता है और इसमें विभिन्न अतिरिक्त लक्षण होते हैं जैसे कि उल्टी, मतली, दृश्य गड़बड़ी, शरीर के विभिन्न हिस्सों में झुनझुनी या सुन्नता। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में माइग्रेन की घटना अधिक आम है और यह ज्यादातर युवावस्था में दिखाई देती है। Aura होम्योपैथी के सर्वश्रेष्ठ होम्योपैथिक डॉक्टर की हमारी टीम ने आनुवंशिक गड़बड़ी की सूचना दी है। दर्द धीरे-धीरे शुरू होता है, हालांकि, धीरे-धीरे दर्द की तीव्रता और आवृत्ति इस हद तक बढ़ जाती है कि यह सामान्य रूप से महीने में 2-4 बार, या अधिक बार होता है, और 1-3 दिनों तक रहता है। सिरदर्द इतना गंभीर है कि रोगी पूरी तरह से कार्रवाई से बाहर हैं। जिन लोगों ने माइग्रेन का अनुभव नहीं किया है, वे शायद ही सोच सकते हैं कि यह स्थिति कितनी विनाशकारी और तड़प रही है। "सामान्य जीवन" पर लौटने में कुछ दिन लगते हैं। अब आप सोच सकते हैं कि इस तरह की समस्या का इलाज जीवन की गुणवत्ता को बदल सकता है।

माइग्रेन-सिरदर्द का ऑरा होम्योपैथिक उपचार पारंपरिक उपचार से कुछ अलग है। मेरे पहले के लेखों से, आप यह पता लगा सकते हैं कि होम्योपैथी एक व्यक्ति का इलाज करता है, एक पूरे जीव के रूप में, और एक बीमारी नहीं है। माइग्रेन सिरदर्द की चिकित्सा शरीर को संपूर्ण रूप से मजबूत करके होम्योपैथी में प्राप्त की जाती है। एक बार सही होम्योपैथिक उपाय चुनने के बाद, माइग्रेन का सिरदर्द गायब हो जाता है। (माइग्रेन सिरदर्द के लिए सर्वश्रेष्ठ होम्योपैथिक दवा देखें)

माइग्रेन के उपचार में होम्योपैथी के परिणाम मैं अपने एक मरीज के उपचार के बयान को प्रस्तुत करना चाहता हूं:

"मैंने अपने सिरदर्द के लिए ऑरा  होम्योपैथी उपचार शुरू किया था क्योंकि मैंने बीस से अधिक वर्षों से पीड़ित माइग्रेन को खराब कर दिया था। मैंने सीखा कि मेरे माइग्रेन कैसे ट्रिगर होते हैं और मैंने उनसे बचने की कोशिश की, लेकिन कभी-कभी ऐसा हुआ कि सभी प्रकार के प्रभाव मेरे खिलाफ हो गए और तब मेरे सिर में असहनीय संवेदनाएं थीं, मैंने उल्टी की, कुछ भी नहीं खा सका। जब मुझे माइग्रेन का दर्द हो रहा था, तो मैं कुछ नहीं कर सकता था। मैं माइग्रेन से बचने के लिए कहीं भी यात्रा करने से बहुत डरता था। 

अपने सामान्य चिकित्सक से मिलने के बाद, मुझे प्राप्त हुआ। दर्द को मारने वाले वही थे जिन्होंने मुझ पर कब्जा कर लिया था, और विश्वविद्यालय से स्नातक होने के बाद, जो शायद सबसे तनावपूर्ण क्षण था, समस्याएं धीरे-धीरे समाप्त हो गईं और हर 2-3 महीने में एक बार केवल जब्ती आई। सालों बाद जब मैं गया तो सब कुछ बदल गया। अध्ययन करने के लिए, मुकाबलों और ट्रिगर्स की तीव्रता में बदलाव आया और बेहतर नहीं होने के कारण, मेरे पास कई दिन के मुकाबलों थे जो सप्ताह में दो बार दोहराए जाते थे।

फिर अकस्मात मैं होमियोपैथी में आ गया। Aura होम्योपैथी में मेरे इलाज की शुरुआत के दौरान मुझे संदेह हुआ, और मैंने मेरे लिए एक उचित सीमा के लिए उपचार में विश्वास बनाने की कोशिश की। मैं किसी चमत्कार में विश्वास नहीं करता, लेकिन मेरा मानना है कि शरीर खुद की मदद कर सकता है।

मैं एक वर्ष से अधिक समय से उपचार में हूं और न केवल मेरे पास माइग्रेन (केवल कभी-कभी न्यूनतम "सामान्य" सिरदर्द) नहीं है, बल्कि मैंने विभिन्न वायरस के प्रति अपनी प्रतिरक्षा में सुधार किया है और आंतरिक रूप से मजबूत महसूस कर रहा हूं।

 उसी समय रासायनिक चिकित्सा के लिए मेरा रिश्ता बदल गया, मैं इस बारे में अधिक ध्यान देने लगा कि मैं रसायन विज्ञान की जगह क्या ले सकता हूं। इसके अतिरिक्त, क्योंकि मुझे अपने उपचार के साथ होने वाले परिवर्तनों का पालन करना है, मैंने अपने शरीर को बेहतर ढंग से सुनना और देखना सीखा है। "

29 वर्षीय यह महिला 9 साल तक माइग्रेन से पीड़ित रही। जैसा कि वह कहती हैं कि पिछले कुछ वर्षों में उनके पास लगातार 2-3 दिनों के दौरे पड़ते हैं। दर्द बेहद गुणकारी था। इस रोगी में, दर्द की तीव्रता इतनी अधिक थी कि कई बार वह सतर्कता से निराशा से बाहर निकलता था या अपने घर पर नहीं पहुंच पाता था।

मेरे परामर्श के दौरान, महिला ने मेरे संपूर्ण चिकित्सा इतिहास, सभी वर्तमान स्वास्थ्य समस्याओं और माइग्रेन के हमलों का वर्णन किया। सभी जानकारी से मैंने इस मामले में सबसे अधिक प्रासंगिक लक्षणों का मूल्यांकन किया है:

वेदनाएँ स्पंदित, स्पंदनशील, अत्यंत तीव्र थीं, जो प्रायः दाहिनी आँख से शुरू होती हैं और दाहिनी नासिका में वापस फैल जाती हैं, उत्तेजित होती हैं और धूप सेंकने और शराब के सेवन से बिगड़ जाती हैं। दर्द भी धनुष द्वारा काफी बढ़ गया था, और रोगी को ठंड के तनाव से राहत मिली और मौन और अंधेरे में पड़ा रहा। दौरे लगभग नियमित रूप से मतली और उल्टी के साथ थे, और अक्सर दृश्य हानि के साथ भी। रोगी ने यह भी शिकायत की कि सूरज पिछले कुछ दिनों में समग्र रूप से खराब हो गया है, अक्सर गर्मी से पीड़ित होता है और थोड़ी प्यास होती है। मसौदे में रहने के बाद, उसके ललाट गुहा दर्दनाक थे।

इस मरीज के लिए मैंने जो होम्योपैथिक उपाय चुना, उसे बेलाडोना कहा जाता है। इसके अलावा, दाईं ओर अत्यधिक सिरदर्द, जो दाहिनी आंख से शुरू होते हैं और नप (या इसके विपरीत) तक फैल जाते हैं, तेज या काफी उत्तेजित हो जाते हैं, जो धूप, शराब या आमतौर पर किसी उत्तेजना संचार प्रणाली द्वारा रहकर होते हैं। इस दवा के लिए विशिष्ट ठंड में सुधार और सामने के दर्द को बिगड़ना भी है। होम्योपैथिक साहित्य में, यह भी पाया जा सकता है कि सिरदर्द अक्सर उल्टी, दृष्टि हानि के साथ होता है और शांति और मौन में अंधेरे कमरे में लेटकर उन्हें सुधारा जाता है।

अन्य लक्षण जो दवा की पुष्टि करते हैं वे लगातार जलन, कम प्यास और गुहाओं में दर्द होते हैं। स्पष्टता के लिए, मैं होम्योपैथिक साहित्य में बेलाडोना के सिरदर्द की विशेषताओं का वर्णन करता हूं।)

एकल खुराक के बाद से, माइग्रेन की तीव्रता काफी कम हो गई थी। पहले 2 महीनों के दौरान, रोगी को 3 गुना कम माइग्रेन था। दवा लेने के 7 दिन बाद पहला "जब्ती" हुआ, लेकिन यह एक वास्तविक माइग्रेन के बजाय एक माइग्रेन की स्थिति जैसा था। मूल माइग्रेन की तुलना में दर्द काफी कमजोर था, और रोगी ने कहा कि उसे एक जब्ती विकसित करने की सामान्य भावना थी, लेकिन अंततः ऐसा नहीं हुआ। शेष दो बरामदगी के लिए, दर्द मूल माइग्रेन की तुलना में लगभग 60-70% कम था और केवल कुछ घंटों (बिना किसी दर्द निवारक के उपयोग) के रहा। तब से, कोई माइग्रेन नहीं हुआ है।

मामला व्यवहार में समानता के नियम को दर्शाता है। होम्योपैथी का काम एक ऐसी दवा खोजना है, जो स्वस्थ व्यक्तियों में और नैदानिक अवलोकन के दौरान परीक्षण करने पर रोगी की बीमारियों के जितना करीब हो सके दिखाया गया है।

मुझे यह इंगित करना चाहिए कि यह अनुचित है, इस लेख को पढ़ने के बाद, कि प्रत्येक प्रवासी होम्योपैथिक बेलाडोना खरीदने के लिए चला गया है। इस बात की संभावना कि वह अपने मामले में कार्य करेगा, बहुत कम है। सिरदर्द को ठीक करने वाली दवाएं सैकड़ों हैं और हर विवरण इस तथ्य में भूमिका निभा सकता है कि एक ही निदान वाले रोगी को दूसरी दवा की आवश्यकता होगी। होम्योपैथी के दृष्टिकोण से, माइग्रेन (किसी भी अन्य बीमारी की तरह) दो लोगों में पूरी तरह से समान नहीं है। कई मामलों में, यहां तक कि सिरदर्द भी दूसरे क्रम का है, और दवा का चयन मानसिक और भावनात्मक लक्षणों या अन्य विशिष्ट और अद्वितीय शारीरिक अभिव्यक्तियों के आधार पर किया जाता है। इसलिए, माइग्रेन के बीस रोगियों को बीस अलग-अलग दवाओं की आवश्यकता हो सकती है, और सही दवा चुनना एक प्रशिक्षित होम्योपैथ का काम है।

बेलाडोना न केवल सिरदर्द को ठीक करता है, बल्कि विभिन्न प्रकार की परेशानियों (साथ ही अन्य होम्योपैथिक दवाओं) को भी कवर करता है। यह सूजन, फोड़े, तीव्र बुखार की बीमारियों, उच्च रक्तचाप, मिर्गी या कोरिया जैसे थायरॉयड विकारों, थायरॉयड विकारों के साथ-साथ उन्मत्त दौरे, मानसिक स्थितियों और कई अन्य समस्याओं के लिए भी सफलतापूर्वक उपयोग किया जाता है।

उपरोक्त मामला उन "आदर्श" में से है जब उपचार का तीव्र प्रभाव होता है। माइग्रेन के सभी मामलों में दौरे इतनी जल्दी दूर नहीं होते हैं, लेकिन आमतौर पर रोग का निदान बहुत अच्छा है। कुछ रोगियों में, उपचार कई महीनों या वर्षों तक रहता है इससे पहले कि बरामदगी पूरी तरह से समाप्त हो जाए, हालांकि, ध्यान देने योग्य दर्द से राहत और बरामदगी की कम आवृत्ति आमतौर पर सही दवा प्राप्त करने के कुछ हफ्तों के भीतर होती है। युवा रोगियों में माइग्रेन के लंबे समय तक इलाज या यहां तक कि बचपन के सिरदर्द के कारण होता है क्योंकि इस तरह के दर्द आनुवांशिक गड़बड़ी द्वारा दृढ़ता से वातानुकूलित होते हैं। सीधे शब्दों में कहें, तो आप लंबे समय तक माइग्रेन से पीड़ित रहते हैं, उपचार धीमा हो जाएगा।


Friday, 18 January 2019

सर्दी खासी जुकाम का होम्योपैथीक सर्वेष्ट इलाज

सर्दी खासी जुकाम का होम्योपैथीक सर्वेष्ट इलाज

फरीदाबाद 18 जनवरी : भरी हुई नाक तब होती है जब नाक और आसन्न ऊतकों और रक्त वाहिकाओं को अधिक तरल पदार्थ के साथ सूज हो जाता है, जिससे "घृणित" लग रहा हो। नाक की भीड़ या अनुनासिक निर्वहन या "बहुरंगी नाक" के साथ नहीं हो सकती है।


आमतौर पर नाक की भीड़ पुराने बच्चों और वयस्कों के लिए एक झुंझलाहट है। लेकिन नाक की भीड़ उन बच्चों के लिए गंभीर हो सकती है जिनकी नींद उनकी नाक की भीड़ या शिशुओं से परेशान होती है, जिनके परिणामस्वरूप एक कठिन समय पर भोजन हो सकता है।


कारण - नाक की भीड़ किसी भी चीज के कारण हो सकती है जो अनुनासिक ऊतकों को उत्तेजित या उत्तेजित करती है। संक्रमण - जैसे सर्दी, फ्लू या साइनसाइटिस - एलर्जी और विभिन्न परेशानी, जैसे कि तम्बाकू धूम्रपान, सब कुछ नाक का कारण हो सकता है कुछ लोगों को बिना किसी स्पष्ट कारण के लिए लंबे समय से चलने वाले नाक हैं - एक शर्त जिसे नॉनलार्लिक राइनाइटिस या वासोमोटर रिनिटिस (वीएमआर) कहा जाता है।


कम सामान्यतः, नाक की भीड़ कणिकाओं या एक ट्यूमर के कारण हो सकती है।


नाक की भीड़ के संभावित कारणों में शामिल हैं: तीव्र साइनसाइटिस, एलर्जी, क्रोनिक साइनसिस, सामान्य सर्दी, डिकॉग्स्टेस्टेंट नाक स्प्रे अति प्रयोग, विच्छेदन सेप्टम, मादक पदार्थों की लत, सूखी हवा, बढ़े हुए एनोनेओड्स, नाक में विदेशी शरीर, हार्मोनल परिवर्तन, फ्लू, दवाएं, जैसे कि उच्च रक्तचाप की दवाएं, नाक जंतु, गैर एलर्जी रैनिटिस, व्यवसायिक अस्थमा, गर्भावस्था, श्वसन संक्रमण संबंधी वायरस, तनाव, थायराइड विकार, तंबाकू का धुआं, बहुभुज के साथ ग्रैनुलोमेटोसिस

Best homeopathy medicine for Sinusitis, rhinitis, nasal polyp - stuffy nose

NUX VOMICA 30-Nux Vomica नाक बाधा रात के समय में अपने चरम पर है जब राहत प्रदान करने में महान मदद के प्रभावी होम्योपैथिक उपाय नक्स वोमिका रात के घंटों में बेहद भरे हुए नाक वाले रोगियों को आराम प्रदान करने में बहुत फायदेमंद है। रोगियों को इस होम्योपैथिक उपाय की आवश्यकता होती है, रात के समय तीव्र नाक भराई होती है। व्यक्ति यह भी वर्णन कर सकता है कि दिन के दौरान, रात में नाक निर्वहन होता है, इसे अवरुद्ध कर दिया जाता है। इसके अलावा मरीज़ एक तरफ नाक की बाधा और अन्य पर मुक्ति के मुक्त महसूस कर सकते हैं। खुली हवा में जाकर नाक अवरोध को भी बिगड़ता है।

सैम्बुक्स एनआईजी 30-सॅंबुबुस नाक रुकावट के लिए एक और शीर्ष होम्योपैथिक दवा है जो अत्यंत नाक नाक छिद्रों के साथ है। रुकावट के कारण सांस लेने में बहुत मुश्किल है और यह व्यक्ति को बैठने के लिए मजबूर करता है। अधिकतर रात में, घुटन और साँस लेने में कठिनाई के कारण व्यक्ति को नींद से बैठना पड़ता है। नाक अवरोध के लिए शिशुओं को दिया जाने पर सैंबुबुस भी बहुत प्रभावशाली होता है। रुकावट घुटन और मुँह में सांस लेने की ओर जाता है और शिशु को मां की फूड लेने के दौरान बुरी स्थिति का सामना करना पड़ता है

आर्सेनिक्स एल्बम 30-आर्सेनिकम एल्बम का निर्धारण तब किया जाता है जब नाक के अवरोध नाक एलर्जी के कारण होते हैं। यह मुख्य रूप से निर्धारित होता है जब नाक अवरोध के साथ जल नाक निर्वहन जल रहा है। वहाँ नाक से प्रचुर मात्रा में पानी और उत्तेजक निर्वहन है। तीव्र प्यास है और मरीज को खुली हवा में भी बुरा लगता है।

ग्लेज़ैमियम 30-गिल्सिमियम निर्धारित किया जाता है जब नाक रुकावट में बंद महसूस होने के साथ सुस्त सिरदर्द होता है, और एक धाराप्रवाह नाक निर्वहन होता है।

सिनापिस एनआईजीआरए 30 - सिनापीस नीग्रै एलर्जी के कारण नाक की भीड़ के लिए एक और उपाय है। यह तब निर्धारित होता है जब वैकल्पिक नहर एलर्जी की प्रतिक्रिया के कारण अवरुद्ध होते हैं। नाक और आंखों से भी मुक्ति होती है।

कैलकिया कार्ब 30- नाक पॉलीप के कारण कैल्केरा कार्ब नाक रुकावट के लिए बहुत प्रभावी है कार्ब नाक कणों के लिए एक और उत्कृष्ट होम्योपैथिक दवा है। यह ज्यादातर बाएं पक्षीय नाक कणों के लिए संकेत दिया जाता है। बाएं तरफ नलिका अवरुद्ध लगता है नाक से भ्रूण पीला डिस्पैच के साथ इसमें शामिल किया जा सकता है नाक में दुख और विकृत सनसनी भी महसूस होती है। नाक में आक्रामक गंध भी चिह्नित है नाक की जड़ में बहुत अधिक सूजन होती है। क्लेक्वेरा कार्ब का निर्धारण तब किया जाता है जब लोग आसानी से ले जाते हैं। मौसम में बदलाव नाक की शिकायतों से जुड़ा होता है। कैल्केरा कार्ब वसा, पिलपिला व्यक्तियों के लिए अधिक उपयुक्त है, जिनके अंडे की लालसा है।

लैम्ना लघु 30 - पॉलिप्स के कारण नाक अवरोध को हटाने के लिए लेम्ना माइनर शीर्ष होम्योपैथिक उपाय है। इसका उपयोग करने वाले लक्षण श्वास लेने में कठिनाई के साथ नाक कब्ज और गंध की हानि होते हैं। पोस्टेरियर टपकता भी नाक रुकावट के साथ आते हैं। कुछ व्यक्ति नाक डिस्चार्ज का अनुभव करते हैं, जबकि अन्य में, नाक गुहा शुष्क रहता है। अवरुद्ध नाक में आक्रामक गंध है लेम्ना माइनर पॉलीप के लिए सबसे प्रभावी होम्योपैथिक उपाय है जो गीली मौसम में बिगड़ता है। पॉलीप के मामलों में, लेम्ना माइनर नाक अवरोध को कम कर देता है, श्वसन की समस्या से राहत देता है, और गंध की शक्ति फिर से आती है।

संगीन्रिया नाइट्रिकम 3 एक्स - सोंगुनेरिया नाइट्रिकम, पॉलीप के कारण नाक की भीड़ के लिए भी प्रभावी है और यह नाक को नाक के नाक के साथ अवरुद्ध होने पर भी एक प्रभावी होम्योपैथिक दवा है। डिस्चार्ज प्रकृति में बहुत जलते हैं और व्यक्ति को छींकने का भी अनुभव होता है।

काली बीआईटीमाइकियम 30-काली बिच्रिमिक्यू सिनाइसिस के कारण नाक की भीड़ के लिए एक उत्कृष्ट उपाय है, जहां डिस्चार्ज गले में वापस चला जाता है।

Wednesday, 12 December 2018

दवाओं की ऑनलाइन बिक्री : मनसुख मंडाविया रसायन एव उर्वरक राज्य मंत्री

दवाओं की ऑनलाइन बिक्री : मनसुख मंडाविया रसायन एव उर्वरक राज्य मंत्री

NEW DELHI  ( 13 दिसम्बर ) केन्द्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग, नौवहन तथा रसायन एव उर्वरक राज्य मंत्री श्री मनसुख एल.मंडाविया ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि दवाओँ की ऑनलाइन बिक्री के लिए पृथक दिशा-निर्देश के संबंध में कहा कि औषधि और प्रसाधन नियम, 1945 में औषधियों की बिक्री, भंडारण और विपणन के प्रावधान है।

श्री मंडाविया ने कहा कि स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय ने ई-फॉरमेसी के माध्यम से दवाओं की बिक्री भंडारण और विपणन के नियमन के लिए औषधि व प्रसाधन नियम में संशोधन के लिए मसौदा प्रकाशित किया है।

मसौदे के अनुसार ई-फॉरमेसी पोर्टल में दवा विक्रेता के नाम, पंजीयन संख्या और फॉरमेसी परिषद से संबंधित विभिन्न ब्यौरे की जानकारी दी जाएगी।
डॉ सरिता से मिलकर संतान उत्पति ना होने से मायूस लोगों में नज़र आई आशा की किरण

डॉ सरिता से मिलकर संतान उत्पति ना होने से मायूस लोगों में नज़र आई आशा की किरण

फरीदाबाद ( 12 दिसम्बर )   विवाह के वर्षों बाद भी जिन दम्पतियों की संतान नहीं हो पा रही है , डॉ सरिता से मिलकर उन्हें संतान उत्पति की किरण नज़र आने लगी है। ऐसे मायूस लोगों के चेहरों पर आशा दिखाई दे रही है। रिवाइव आई वी ऍफ़ केयर में ऐसे दम्पतियों के लिए लगाए गए दो दिवसीय शिविर में आये ऐसे सैंकड़ों विवाहित जोड़ों ने बच्चे न होने की परेशांनियाँ डॉक्टर सरिता व उनकी टीम के समक्ष रखी और डॉ सरिता ने उन्हें बताया की टेस्ट ट्यूब बेबी एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमे अधिकतर मामलों में सफलता मिलती है। ऐसे अनेक दम्पति हैं जिन्हे इस प्रक्रिया से लाभ हुआ है और उन्हें संतान प्राप्ति हुई है। डॉ सरिता ने शिविर में आये दम्पतियों को बताया की टेस्ट ट्यूब बेबी की प्रक्रिया से होने वाले लगभग ज़यादातर बच्चे तथा माताएं स्वस्थ होते हैं। 

पांच नंबर में खुले इस आई वी ऍफ़ केंद्र के प्रांगण में लगे प्रथम  शिविर में ऐसे अनेक दम्पतियों ने भाग लिया , जिनके विवाह को कई वर्ष हो चुके हैं लेकिन उनकी संतान नहीं हो पा रही , जिसकी वजह से वह मायूस से होने लगे हैं।  कई पति -पत्नियों ने डॉ सरिता को बताय कि वह इस दौरान कई डॉक्टरों के पास जा जा कर थक चुके हैं , लेकिन उन्हें कहीं से भी कोई सुखद परिणाम नहीं मिला। डॉ सरिता ने उन्हें विश्वास दिलाया और बताया कि आई वी ऍफ़ की प्रक्रिया से अधिकतर केसों में ऐसे मायूस हो चुके लोगों को भी स्वस्थ संतान की प्राप्ति हुई है। डॉ  सरिता  ने बताया कि वह पिछले दस वर्षों से भी अधिक से नॉएडा में ऐसा ही केंद्र चला रही हैं , और वहां आने वाले  अब तक सैंकड़ों दम्पति ऐसे हैं जिनको संतान की प्राप्ति हुई है।  डॉ सरिता से मिलकर शिविर में आये लोगों को उम्मीद की किरण नज़र आने लगी है। 

Saturday, 17 November 2018

मानव रचना में स्तन कैंसर की तरफ जागरूकता में उठाया गया एक कदम

मानव रचना में स्तन कैंसर की तरफ जागरूकता में उठाया गया एक कदम

फरीदाबाद, 17 नवंबर: स्तन कैंसर के बारे में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से, डॉ ओपी भल्ला फाउंडेशन, जीवनदायिनी और सर्वोदय अस्पताल और अनुसंधान केंद्र ने स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ सुमंत गुप्ता के साथ स्तन कैंसर स्वास्थ्य जागरूकता पर एक वार्ता का आयोजन किया |

इस विशेष अवसर के लिए डॉ मीनाक्षी खुराना, पीवीसी, एमआरयू; डॉ संगीता बंगा, डीन छात्र कल्याण, जीवनदायिनी से मधुलिका जैन, कई शिक्षिकायें और छात्राएं भी मौजूद थे।

डॉ गुप्ता ने अपने भाषण में कारणों, लक्षणों, इलाज और सावधानी बरतने के महत्व को समझाया । जागरूकता प्रारंभिक पहचान की ओर ले जाती है और शुरुआती पहचान से प्रभावी उपचार और सकारात्मक पूर्वानुमान हो सकता है|

श्रीमती सुधा मुर्गई, निदेशक, भारत रोको कैंसर चैरिटेबल ट्रस्ट और उपाध्यक्ष, कैंसर केयर इंडिया इस अवसर के लिए मुख्य अतिथि थी और उन्होंने इस बीमारी से पीड़ित लोगों की सेवा करते हुए अपने 40 वर्ष के लम्बे सफर की एक भावविभोर कर देने वाली छवि का एक छोटा सा विवरण दिया | वह स्वयं एक कैंसर पीड़ित रही हैं तथा उन्होंने इस बीमारी से किस प्रकार जीत हासिल की ये बता कर सबको इस बीमारी से न डरने और डटे रहने की प्रेरणा दी |

यह एक ऐसा सत्र था जिसने न केवल जागरूकता पैदा की बल्कि सभी को भी प्रेरित किया की वो इस बीमारी के बारे में बात करें, स्वयं भी जागरूक रहे तथा अपने परिवार व नज़दीकी सभी को इसकी जानकारी दें|  

Sunday, 28 October 2018

थ्रोम्बोलिसिस तकनीक से मेट्रो अस्पताल में 400 स्ट्रोक मरीजों को मिला नया जीवन : डा. रोहित गुप्ता

थ्रोम्बोलिसिस तकनीक से मेट्रो अस्पताल में 400 स्ट्रोक मरीजों को मिला नया जीवन : डा. रोहित गुप्ता

फरीदाबाद 28 अक्टूबर । वल्र्ड स्ट्रोक डे की पूर्व संध्या पर सेक्टर-16ए स्थित मेट्रो अस्पताल में एक जागरुकता सेमिनार का आयोजन किया गया। इस सेमिनार में मेट्रो अस्पताल के वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट डा. रोहित गुप्ता ने स्ट्रोक होने के लक्ष्ण एवं उसके बचाव के तरीकों के बारे में विस्तारपूर्वक बताया। इस सेमिनार में रेजिडेंट वेलफेयर एसो. के साथ-साथ कई गणमान्य लोगों ने हिस्सा लिया। सेमिनार में पंकज मेहरा व हरेंद्र नामक व्यक्ति भी मौजूद थे, जिन्हें स्ट्रोक हुआ था और उनका थ्रोम्बोलिसिस तकनीक से सफल इलाज हुआ, उन्होंने भी स्ट्रोक के उपचार से जुड़े अपने अनुभव को साझा किया।  डा. गुप्ता ने बताया कि थ्रोम्बोलिसिस तकनीक के द्वारा स्ट्रोक का सफलतापूर्वक इलाज किया जा सकता है और अब तक वह इस इंजेक्शन के माध्यम से करीब 400 स्ट्रोक मरीजों को लाभ पहुंचा चुके है क्योंकि इसके परिणाम बहुत अच्छे है। उन्होंने कहा कि थ्रोम्बोलिसिस इंजेक्शन मरीज को स्ट्रोक होने के साढ़े तीन घण्टे तक दे दिया जाना चाहिए, जिससे वह पूरी तरह से ठीक हो सकता है परंतु साढे चार घण्टे के बाद इस इंजेक्शन का कोई फायदा नहीं होता इसलिए स्ट्रोक के मरीज को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाना चाहिए, 

जहां उसके सिटी स्क्रैन होने के बाद उसका इलाज शुरु हो सके। डा. रोहित गुप्ता ने बताया कि अन्य देशों के मुकाबले में भारत में स्ट्रोक के मरीजों में लगातार वृद्धि हो रही है। स्ट्रोक एक इमरजेंसी है, जिसके बारे में जानकारी रखना बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि थोड़ी सी सावधानी और सतर्कता किसी जिंदगी बचा सकती है। उन्होंने बताया कि हर वर्ष भारत में 16 से 18 लाख लोगों की स्ट्रोक से मौत होती है।ब्रेन स्ट्रोक के लक्ष्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि इसमें मस्तिष्क की कोशिकाएं रक्त के अभाव में मृत होने लगती हैं, अचानक संवेदनशून्य हो जाना, शरीर के एक भाग में कमजोरी आ जाना, बोलने में मुश्किल होना, चलने में मुश्किल एवं चक्कर आना इसके लक्ष्ण है। उन्होंने बताया कि स्ट्रोक के मुख्य कारण आजकल की आधुनिक जीवनशैली, तनाव, हाईपरटेंशन, धूम्रपान और डायबिटिज है। स्ट्रोक रोगियों के लिए थ्रोम्बोलाइसिस इंजेक्शन एक नई तकनीक है, 

मेट्रो अस्पताल फरीदाबाद में थ्रोम्बोलाइसिस तकनीक द्वारा अब तक 400 से अधिक मरीजों को ठीक किया जा चुका है। इसके लिए उम्र की कोई सीमा नहीं है। हमारे विभाग में उच्च न्यूरो इमेजिंग तकनीक संसाधन उपलब्ध है। अस्पताल में एमआरआई व सीटी स्कैन की सुविधा भी उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि स्ट्रोक/लकवाग्रस्त 40 साल से कम के लोगों में भी हो सकता है। थ्रोम्बोलाइसिस की यह तकनीक लकवा होने के 4.5 घण्टे तक की जा सकती है। तीव्र स्ट्रोक/लकवाग्रस्त होने पर मरीज को जल्द से जल्द अस्पताल लेकर आना चाहिए। डा. रोहित गुप्ता ने कहा कि थ्रोम्बोलाइसिस चिकित्सा के उपयोग व जागरुकता पर जोर देने की जरुरत है। विंडो पीरियड का महत्व, थ्रोम्बोलाइसिस चिकित्सा का लाभ, स्ट्रोक के बारे में जानकारी होनी चाहिए।

Thursday, 11 October 2018

Best Homeopathic medicine for Uric acid -Gout

Best Homeopathic medicine for Uric acid -Gout

फरीदाबाद 12 अक्टूबर ।  शास्त्रीय होम्योपैथिक क्लिनिक में, किसी भी बीमारी के लिए हमारा दृष्टिकोण व्यक्ति को पूरी तरह से इलाज करना है। इस प्रकार, रोगी के संविधान को कम करने से हमेशा शास्त्रीय होम्योपैथिक डॉक्टर को सबसे उपयुक्त उपाय चुनने में मदद मिलती है। सही होम्योपैथिक दवा के साथ डॉ। अभिषेक के अनुसार, एक आहार लेना बहुत महत्वपूर्ण है जो purines में कम है।

उच्च यूरिक एसिड के लिए सर्वश्रेष्ठ होम्योपैथी चिकित्सा
आउरा होम्योपैथी में, डॉक्टरों की हमारी खुराक रोगी की कुल तस्वीर के आधार पर होम्योपैथिक दवा निर्धारित करती है जिसमें उसकी जीवनशैली, मानसिक तनाव, उसके तनाव स्तर और भावनात्मक स्थिति, उनके चरित्र, आहार, यूरिक एसिड का पारिवारिक इतिहास और अन्य कारक शामिल हैं। गौट-एरिक एसिड के लिए सर्वश्रेष्ठ होम्योपैथिक दवा खोजने के लिए - दर्दनाक जोड़। ऑरा होम्योपैथी क्लिनिक में, हमारे उपचार को वैयक्तिकृत किया जाता है, यानी गठिया या उच्च यूरिक एसिड स्तर वाले 2 रोगियों को अलग-अलग व्यक्तियों के रूप में माना जाता है, और प्रत्येक रोगी को होम्योपैथिक दवा निर्धारित की जाएगी जो उनके लक्षण के साथ सबसे अच्छी तरह से मेल खाती है।

उच्च यूरिक एसिड होने के जोखिम के बारे में और जानने के लिए हमें देखें
गठिया के इलाज के लिए नीचे 10 सर्वश्रेष्ठ होम्योपैथी दवाएं हैं- उच्च यूरिक एसिड।

कोल्चिकम: महान पैर की उंगलियों के दर्द और सूजन, एड़ी में दर्द की मरीज की शिकायत, वह भी छूने के लिए सहन नहीं कर सकता है। निचले हिस्सों की सूजन और ठंडाता। दर्द और बुखार के साथ जोड़ों की कठोरता। कभी-कभी दर्द को बदलने के रोगी की शिकायतों। रात और शाम को गर्म मौसम से दर्द बढ़ जाता है। अधिक जानकारी हमें देखें: दिल्ली में सर्वश्रेष्ठ होम्योपैथी डॉक्टर

यूर्टिका यूरेन: यह होम्योपैथिक दवा उच्च यूरिक एसिड के स्तर के इलाज के लिए सर्वश्रेष्ठ है क्योंकि यह हमारे शरीर से यूरिक एसिड को खत्म करने में वृद्धि करती है। डायथेसिस: गठिया और यूरिक एसिड। संयुक्त दर्द त्वचा के विस्फोट जैसे आर्टिकरिया से जुड़ा हुआ है। Deltoid, कलाई और एड़ियों में सूजन और दर्द की रोगी शिकायत।

बेंजोइक एसिड: आक्रामक और उच्च रंगीन मूत्र के साथ-साथ क्रैकिंग ध्वनियों के साथ दर्द और पेट की सूजन और अन्य जोड़ों की सूजन की शिकायतें। दर्दनाक गठिया नोड्स। उजागर और खुली हवा में संयुक्त दर्द बढ़ता है।

लेडम पाल: आरोही संधिशोथ के लिए सर्वश्रेष्ठ होम्योपैथिक दवा, विशेष रूप से छोटे जोड़ों के दर्द को अलग करना। ग्रेट पैर की अंगुली दर्दनाक, सूजन और स्पर्श करने के लिए गर्म। सामान्य रूप से शीत अनुप्रयोग के साथ दर्द ठीक हो जाता है।

एंटीमोनियम क्रूड: गैस्ट्रिक शिकायतों के साथ विशेष रूप से ऊँची एड़ी और उंगलियों में गठिया दर्द। जीभ मोटी सफेद लेपित है। गर्मी और ठंडे स्नान के साथ लक्षण बढ़े। 

सबिना: यह गर्भाशय बीमारियों के साथ महिला रोगी के लिए सबसे अच्छा है। गर्म कमरे में संयुक्त दर्द खराब हो जाता है। लाल चमकदार सूजन और गौटी नोडोसिटी की रोगी शिकायतें। Esp। गर्भाशय की परेशानी के साथ महिलाओं में।

अर्नीका: सूजन और दर्द से पीड़ित भावनाओं के साथ जोड़ों में दर्द, दर्द चलने के साथ बढ़ता है। अलग संयुक्त दर्द के कारण, रोगी को उसके निकट छुआ या संपर्क करने से डर लगता है।

बर्बेरिस वल्गारिस: क्रोनिक गठ संविधान। दर्द की अचानक शुरुआत। जोड़ों में अचानक सिलाई दर्द की रोगी शिकायतें। दर्द गति के साथ बढ़ता है। मेटाटारल हड्डियों के बीच दर्द को सिलाई करना जैसे नाखून छेड़छाड़ कर रहा है, खड़े होने पर दर्द बढ़ता है।

लाइकोपोडियम: एक कंकड़ पत्थर से दर्द को ठीक करें। पैर की उंगलियों और उंगलियों में दर्द के साथ तलवों पर कॉलोसिटी। दाहिने पैर गर्म और बाएं पैर ठंडा। पेशाब के दौरान रोगी रोना, पेशाब में लाल तलछट। पेशाब गुजरने के बाद बैकैश में सुधार हुआ। संयुक्त दर्द और अन्य शिकायतें 4 बजे से शाम 8 बजे के बीच बढ़ीं।


Rhododendron: जोड़ों के दर्द और सूजन विशेष रूप से महान पैर की अंगुली संयुक्त, दर्दनाक स्थिति तूफान से पहले बढ़ जाती है। सही पक्षपातपूर्ण स्नेह। सुबह में सुबह, तूफान से पहले और लंबे समय तक रहने के बाद संयुक्त दर्द बढ़ गया। सामान्य रूप से गर्मी और खाने में गर्मी के साथ।