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Thursday, 8 August 2019

एशियन बना क्षेत्र का पहला अस्पताल जिसे मिली ब्रेन डेथ किडनी ट्रांसप्लांट की अनुमति

एशियन बना क्षेत्र का पहला अस्पताल जिसे मिली ब्रेन डेथ किडनी ट्रांसप्लांट की अनुमति

 फरीदाबाद  8 अगस्त 2019 - एशियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज अस्पताल को पीजीआई  रोहतक ने ब्रेन डेड यानि जिन लोगों का दिमाग मृत घोषित कर दिया जाता है ऐसे लोगों के परिवार जन  की आज्ञा से किडनी ट्रांसप्लांट करने की अनुमति दे दी गई है I

 एशियन अस्पताल में मरीज को ब्रेन डेड  घोषित करने के लिए एक कमिटी तैयार की जाएगी I व्यक्ति को ब्रेन स्ट्रोक या एक्सीडेंट की स्थिति में यह कमिटी दिमागी टेस्ट करके उससे ब्रेन डेड घोषित करेगी I इस कमिटी में अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट, आई सी यु हेड, न्यूरोलॉजिस्ट, फिजिशियन, एनेस्थीसिया और जनरल सर्जन शामिल होंगे I 

ब्रेन डेड घोषित करने के बाद उसके परिवार जनो से अनुमति ली जाएगी, उनकी अनुमति पर अस्पताल उस व्यक्ति की किडनी किसी और मरीज (जिसकी किडनी फेल हो चुकी है ) उसे ट्रांसप्लांट कर सकता हैI 
जिले का कोई भी अस्पताल सरकारी या गैर सरकारी ब्रेन डेड व्यक्ति की जानकारी एशियन अस्पताल को दे सकता है, जानकारी मिलने के बाद एशियन अस्पताल की कमिटी  की टीम के डॉक्टर परिवार की अनुमति मिलने पर उनकी किडनी दान करा सकते हैं I 

क्या है ब्रेन डेड ?
ब्रेन डेथ एक ऐसे स्तिथि हैं जिसमे व्यक्ति का दिमाग काम करना बंद कर देता है लेकिन उसके शरीर के बाकी अंग सुचारु रूप से काम कर रहे होते हैं जिसे आम भाषा में कोमा की स्तिथि  कहा जाता है I

Wednesday, 7 August 2019

मानसून में रखें साफ-सफाई का ध्यान : डॉ. राम चंद्र सोनी

मानसून में रखें साफ-सफाई का ध्यान : डॉ. राम चंद्र सोनी

फरीदाबाद : 8 अगस्त I  बारिश का झमाझम मौसम और पकौड़ों का स्वाद मन को खुशी तो देता है, लेकिन खान-पान के प्रति बरती जाने वाली लापरवाही कई बार गंभीर रूप धारण कर लेती है। बरसात का मौसम एक ओर तो गर्मी से निजात दिलाता है, लेकिन दूसरी ओर बीमारियों को पनपने का मौका भी देता है। बरसात के दिनों में वायरल इंफेक्शन आम बात है। इस मौसम में पेट से संबंधित बीमारियों के फैलने का भय बना रहता है। डॉ. राम सोनी ने बताया कि उनके पास पीलिया के मरीज भी बाद गए है रोज़ाना 3 -4 मरीज पीलिया के आ रहे हैं

एशियन अस्पताल के एचओडी गैस्ट्रोइंटेरोलॉजी डॉ. राम चंद्र सोनी का कहना है कि मानसून में पेट दर्द की समस्या आम बात है। उल्टी-दस्त, पेट दर्द आदि की समस्या को लेकर अस्पताल में आने वाले मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। इस मौसम में पेट से संबंधित बीमारियां ज्यादा होती है। इन बीमारियों के लक्षण भी कई प्रकार के होते हैं पेट में दर्द होना, उल्टी होना, बदन दर्द और कमर दर्द। डॉक्टर का कहना है कि इस मौसम में बैक्टीरिया ज्यादा प्रभावित होता है और संक्रमण फैलाता है। बाहर का खाना, तला हुुआ, बासी भोजन का सेवन करना, खुले में रखे भोजन का सेवन करने से  भी बीमारियों को फैलने का मौका मिलता है। इस प्रकार का खाना खाने के २४ घंटे के भीतर बीमारियों के लक्षण उभरने लगते हैं।

डॉ. सोनी का कहना है कि अगर हम स्वयं साफ-सफाई की ओर ज्यादा ध्यान दें तो बीमारियों से बचाव किया जा सकता है। फिल्टर्ड और उबला हुआ पानी पीना चाहिए। बासी या खुले में रखा खाना नहीं खाना चाहिए। फल व सब्जियों को धोकर खाना चाहिए। जंक फूड के सेवन से बचना चाहिए। तले व मसालेदार खाने के सेवन से बचना चाहिए। बार-बार हाथ धोने चाहिएं। संतुलित भोजन का सेवन करना चाहिए। 

डॉ. सोनी के अनुसार मानसून हेपेटाइटिस ए और ई के वायरस को प्रभावित करता है। इस बीमारी का प्रमुख कारण दूषित पानी है। खान-पान की लापरवाही लिवर को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है।  इसके लक्षणों के पाए जाने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करके जांच करानी चाहिए। ताकि समय रहते बीमारी का पता लगाकर उचित इलाज किया जा सके। इसके अलावा इस रोग से बचने के लिए साफ-सफाई की ओर विशेष ध्यान देना चाहिए।

Sunday, 28 July 2019

 मेट्रो हॉस्पिटल मैं विश्व हेपेटाइटिस दिवस मनाया गया : डॉ विशाल खुराना

मेट्रो हॉस्पिटल मैं विश्व हेपेटाइटिस दिवस मनाया गया : डॉ विशाल खुराना

फरीदाबाद, 28 जुलाई। इस विश्व हेपेटाइटिस दिवस (28 जुलाई] 2019) के उपलक्ष में मेट्रो अस्पताल के वरिष्ठ पेट एवं लिवर रोग विशेषज्ञ डॉ विशाल खुराना बता रहे हैं हपेटाइिटस के बारे में । 

हेपेटाइटिस क्या है हेपेटाइटिस जिगर, लीवर, यकृत की सूजन है] जो आमतौर पर वायरल संक्रमण के कारण होता है, जो जिगर में सूजन का कारण होता है। जिगर की सूजन के कई कारण हैं जैसे की - वायरल संक्रमण, दवा के दुष्प्रभाव, अत्यधिक शराब का सेवन, इत्यादि। हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी और ई पांच मुख्य हेपेटाइटिस वायरस हैं। ऎकयुट और क्रोनिक हेपेटाइटिस के दो प्रकार होते हैं। ऎकयुट हेपेटाइटिस तब होता है जब यह छह महीने से कम समय तक रहता है] जबकि क्रोनिक हेपेटाइटिस तब होता है जब  हेपेटाइटिस लंबे समय तक बनी रहती है। 

क्या वायरल हेपेटाइटिस एक महत्वपूर्ण समस्या है%
वायरल हेपेटाइटिस के साथ रहने वाले केवल 11% लोग अपनी स्थिति से अवगत हैं। वायरल हेपेटाइटिस विश्व स्तर पर मौत का एक प्रमुख कारण है। हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी वायरस दुनिया में सबसे अधिक (80%) लीवर कैंसर के मामलों में होता है। 
नेशनल सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल ( एनसीडीसी ) द्वारा भारत में हेपेटाइटिस बी 3-4% लोगों में पाया जाता है और हेपेटाइटिस सी 1% मे। पंजाब और हरियाणा के कुछ क्षेत्रों में हेपेटाइटिस काफी अधिक पाया जाता है। भारत में] हेपेटाइटिस ई वायरस (HEV) वयस्कों के हेपेटाइटिस का सबसे महत्वपूर्ण कारण हैI हेपेटाइटिस ए वायरस (HAV) बच्चों में आम है। 

हपेटाइिटस के लक्षण क्या है%
हेपेटाइटिस में हो सकता है कि कोई लक्षण न हो] लेकिन अक्सर ये पीलिया, आहार (भूख) की कमी और अस्वस्थता के साथ प्रस्तुत होता है। बुखार, शरीर में दर्द] थकान] कमजोरी] पेट में दर्द] उलटी] कम भूख का लगना] गहरे रगं का मूत्र और पीली रगं की आँखे होना यह तीव्र हेपेटाइटिस (एक्यूट हेपेटाइटिस) की निशानी माने जाते हैंI बीमारी बढ़ जाने पर पीलीया, पेट का बढ़ना] खून की उल्टी] काले या लाल रगं का मल] असामान्य व्यव्हार] कम भूख का लगना एवं वजन का घटना आदि लक्षण पाये जाते है ।

हेपेटाइटिस संक्रमण के कारण और निवारण%

हेपेटाइटिस के प्रकार कारण निवारण
हेपेटाइटिस ए (HAV) दूषित भोजन खाने या प्रदूषित जल पीने से 1.स्वस्थ और पौष्टिक भोजन खाएं
2.स्वच्छ और सुरक्षित पानी पीना 3.हेपेटाइटिस ऐ टीकाकरण उपलब्ध है
हेपेटाइटिस ई (HEV) दूषित भोजन खाने या प्रदूषित जल पीने से 1.स्वस्थ और पौष्टिक भोजन खाएं
2.स्वच्छ और सुरक्षित पानी पीना 
हेपेटाइटिस बी  (HBV) 1. संक्रमित व्यक्ति के रक्त या अन्य शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क के माध्यम से
2. गर्भावस्था के दौरान संक्रमित मां को बच्चे को 1.आपको गर्भावस्था के दौरान अपना परीक्षण करना चाहिए
2.संक्रमित व्यक्ति के साथ टूथब्रश, रेजर या नाखून कैंची और सुइयों साझा करने से बचें 
3. बिना लाइसेंस वाले सुविधाओं से टैटू या शरीर के छेदों को नहीं करना चाहिए
4. हेपेटाइटिस बी टीकाकरण उपलब्ध है
हेपेटाइटिस सी (HCV) 1. संक्रमित रक्त और सुइयों
2. यह कुछ यौन प्रथाओं के माध्यम से प्रेषित भी किया जा सकता है जहां रक्त शामिल है। 1. संक्रमित व्यक्ति के साथ टूथब्रश, रेजर या नाखून कैंची और सुइयों साझा करने से बचें 
2. बिना लाइसेंस वाले सुविधाओं से टैटू या शरीर के छेदों को नहीं करना चाहिए


हेपेटाइटिस बी संक्रमण रोकने में टीकाकरण बहुत प्रभावी है। हपेटाइिटस बी का टीका 3 बार ( 0, 1 और 6 माह के अंतराल पर ) दिया जाता है जो की 95% तक वायरस से लड़ने में  कारगर साबित होता है। यदि आपको टीका लगाया नहीं गया है] तो टीकाकरण करवाएं] कंडोम का उपयोग करें] और संक्रमित व्यक्ति के साथ टूथब्रश] रेज़र] नाख़ून कैंची या सुई को साझा करने से बचें। आपको बिना लाइसेंस वाले सुविधाओं से टैटू या शरीर के छेदों को नहीं करना चाहिए। यदि आपको लगता है कि आपको भविष्य में संक्रमित होने की संभावना है] तो टीकाकरण होना आवश्यक है। हेपेटाइटिस बी संक्रमित मां से पैदा होने वाले बच्चे को 12 घंटे के भीतर टीका लगाया जाना चाहिए, क्योंकि यह एक संक्रमण को रोक सकता है जो क्रोनिक हेपेटाइटिस बी में बदलने की संभावना रखता है।

उपचार%
हेपेटाइटिस ए और ई: हेपेटाइटिस ए और ई आमतौर पर तीव्र/ ऎकयुट (acute) हेपेटाइटिस का कारण बनता है जिससे शरीर अक्सर कुछ हफ्तों के भीतर ही संक्रमण को साफ कर सकता है। हालांकि, संक्रमण कभी&कभी आगे की जटिलताओं का कारण बन सकता है। हे हेपेटाइटिस ए और ई के लिए अलग से कोई दवाई नहीं है। उपचार मुख्य रूप से लक्षणों के आधार पर होता है

हेपेटाइटिस बी: हमारे पास दवाएं] जैसे पेगेंटरफेरॉन इंजेक्शन और एंटीवायरल (एनटेकवीर / टेनोफॉवीर) गोलियां, उपलब्द हैं। ये दवाएं वायरस की प्रतिकृति को धीमा कर देती हैं और कभी-कभी इसका निष्कासन कर देती है। सबसे महत्वपूर्ण बात है कि यह दवाएं जटिलताओं के जोखिम को बहुत कम करती हैं जो हेपेटाइटिस बी के कारण हो सकता है जैसे लिवर सिरोसिस और लिवर कैंसर।

हेपेटाइटस सी: दवाईयां हेपेटाइटिस सी संक्रमण का इलाज कर सकता है। पहले इसका इलाज इंजेक्शन से ही होता था लेकिन आजकल एंटीवायरल ड्रग्स (सोफोसबुवीर / लीडिपैसवीर / डाक्लाट्सविर / वेलपात्सिर) उपलब्ध हैं जो की खाई जा सकती हैं। 

हेपेटाइटिस में जिगर की क्षति को रोकने के लिए टिप्स:

ऐसा करें ऐसा न करें
हेपेटाइटिस के लिए टीकाकरण शराब, तंबाकू और ड्रग्स से बचें
बहुत सारे तरल पदार्थ पीयें और हाइड्रेटेड रहें खाना जो आप बर्दाश्त नहीं कर सकते उस से बचें
प्रयाप्त कैलोरी/भोजन का सेवन बनाए रखें तनाव से बचें



आईएमए फरीदाबाद ने फ्रूट और ऑर्नामेंटल के पौधे लगाए : डॉ  पुनीता हसीजा प्रधान

आईएमए फरीदाबाद ने फ्रूट और ऑर्नामेंटल के पौधे लगाए : डॉ पुनीता हसीजा प्रधान

फरीदाबाद, 28 जुलाई।  आई एम ए फरीदाबाद ने अपना हरित क्रांति का अभियान जारी रखते हुए दूसरे चरण में आज सुबह मेट्रो हॉस्पिटल के प्रांगण में वृक्षारोपण किया , आईएमए की प्रधान डॉक्टर पुनीता हसीजा ने बताया की आई एम ए ने पूरे फरीदाबाद मैं 100 पौधे लगाए और फ्रूट और ऑर्नामेंटल के लगाए और कहा कि जितने ज्यादा पौधे लगाए जायेगे उतनी हम बीमारियों से बचे गए और प्रदूषण से बचाव होगा I  

विपुल गोयल यहां पर मुख्य अतिथि थे । सभी डॉक्टर्स  ने मिलकर कई सारे पौधे लगाए। डॉ एसएस बंसल व डॉ सीमा बंसल का इस कार्यक्रम में विशेष योगदान रहा ।आईएमए की प्रधान डॉक्टर पुनीता हसीजा ,पूर्व प्रधान डॉक्टर सुरेश अरोड़ा ,डॉ भारती गुप्ता, डॉ राजीव जैन ,डॉ हर्ष नंदिनी ,डॉक्टर संगीता,डॉक्टर मनीषा, डॉक्टर सोनल गोयल, डॉ अरविंद ,डॉक्टर आभा,  डॉ रमा मंगला, डॉक्टर सतीश मंग्ला ,डॉ अशोक चांदना, डाक्टर अशोक चावला, डॉ अशोक ग्रोवर ,डॉ अमित ग्रोवर मुख्य रूप से उपस्थित थे ।

Saturday, 6 July 2019

मैट्रो अस्पताल फरीदाबाद ने न्यूरोइलेक्ट्रोफिजियोलोजी (मस्तिष्क जाँच लैब) यूनिट को बनाया और अधिक अत्याधुनिक

मैट्रो अस्पताल फरीदाबाद ने न्यूरोइलेक्ट्रोफिजियोलोजी (मस्तिष्क जाँच लैब) यूनिट को बनाया और अधिक अत्याधुनिक

फरीदाबाद 6 जुलाई : मैट्रो अस्पताल फरीदाबाद में न्यूरोइलेक्ट्रोफिजियोलोजी (मस्तिष्क जाँच लैब) यूनिट को और अधिक अत्याधुनिक बनाया गया है। यूनिट का उद्घाटन अस्पताल के सीनियर कार्डियोलोजिस्ट एवं मैनेजिंग डायरेक्टर डा.एस.एस बंसल, स्त्री रोग विशेषज्ञ एवं डायरेक्टर डा. सीमा बंसल, डा नीरज जैन सीनियर कार्डियोलोजिस्ट एवं मेडिकल डायरेक्टर, सीनियर विशेषज्ञ एवं एच.ओ.डी. मस्तिष्क रोग विभाग डा. सुषमा शर्मा एवं मस्तिष्क रोग विशेषज्ञ डा. पांडुरंगा एम.एस. ने किया। इस मौके पर डा एस.एस. बंसल ने कहा कि हम हमेशा अपने मरीजों को बेहतर चिकित्सा सेवा देने के लिए अस्पताल को अत्याधुनिक एवं नवीनतम तकनीकी संसाधनों से लैस करने की दिशा में अग्रसर है। हमारे पास मस्तिष्क रोग विशेषज्ञों की बेहतरीन टीम है जो मरीजों को प्राथमिक उपचार के साथ ही गंभीर परिस्थितियों में भी बेहतर स्वास्थ्य सेवायें देने के लिए कार्यरत है।



नई न्यूरोइलेक्ट्रोफिजियोलोजी (मस्तिष्क जाँच लैब) यूनिट में वीडियो ई.ई.जी.,(वीडियो टेलीमेटरी सुविधा), ई.एम.जी., एन.सी.वी. एवं इवोक पोटेसिंयल जोकि मिर्गी, न्यूरोपैथी, नसों की बीमारियों जैसी अनेको बीमारियों के निदान एवं उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

अस्पताल की सीनियर विशेषज्ञ एवं एच.ओ.डी. मस्तिष्क रोग विभाग डा. सुषमा शर्मा ने बताया कि मैट्रो अस्पताल अंतराष्ट्रीय मानकों एवं तकनीक के द्वारा रोगी की पुरानी से पुरानी मस्तिष्क रोग से जुड़ी बीमारियों को पहचान कर उनका निदान करता है। इन बीमारियों में प्रमुखतः लकवा (स्ट्रोक), मिर्गी दौरे, एन्सेफैलोपैथिस (भ्रम की स्थिति), ज्यादा दिन तक आई.सी.यू. में रहने पर रोगियों में मस्तिष्क संबंधी समस्याएं, मस्तिष्क में सूजन, हाथ-पैर में कंपन होना आदि। कुशल विशेषज्ञों, नवीनतम तकनीक, अत्याधुनिक उपकरण एवं 100 बैड युक्त आईसी.यू. हमारे इस मस्तिष्क विभाग को सर्वश्रेष्ठ बनाती है। हम हमेशा अपने मरीजों कोे सस्ती मेडिकल सुविधायें अंतराष्ट्रीय मानक पर प्रदान करते है। हमारी इस न्यूरोइलेक्ट्रोफिजियोलोजी (मस्तिष्क जाँच लैब) यूनिट में कुछ महत्वपूर्ण सुविधायें है जैसे कि -

ई.ई.जी.:-  यह एक नाॅन-इनवेसिव जाँच है जिसका उपयोग मस्तिष्क की इलैक्ट्रीकल प्रक्रिया का पता लगाने और रिकार्ड करने के लिए किया जाता है। इसका उपयोग मिर्गी, मस्तिष्क ट्यूमर और भ्रम की स्थिति जैसे मस्तिष्क विकारों के निदान के लिये किया जाता है। भ्रम की स्थिति के रोगी यदि लंबे समय से बीमार है इसका कारण पता करने के लिए यह बेहद उपयोगी है। 

एन.सी.वी:- यह उपकरण हमारी माँसपेशियों में इलैक्ट्रीकल वेग मापने और रिकार्ड करने के लिए होता है इससे हमारी नसों में आवेग कितनी तेजी से बढ़ता है और उससे कितनी क्षति पहुँची है का पता चलता है।

ई.एम.जी.:- ई.एम.जी. परीक्षण हमारी मांसपेशियों के माध्यम से आगे बढ़ने वाले इलैक्ट्रीकल संकेतो को रिकार्ड करता है। यह किसी भी बीमारी की उपस्थिति, स्थान और सीमा को पता लगाने में मदद करता है जिसके कारण हमारी तंत्रिकाओं और माँसपेशियों को नुकसान पहुँचा है। 

वीडियो टेलीमेट्री:- यह परीक्षण विभिन्न प्रकार के दौरे के उपचार के निदान और योजना बनाने में बेहद उपयोगी होता है।

उपरोक्त उपकरणों के अलावा हमारे पास मस्तिष्क रोगियों के इलाज के लिए सी.टी. स्कैनर, एम.आई.आई और 3डी कैथ लैब भी है जो विभिन्न न्यूरोलाॅजिकल विकारों के इलाज और निगरानी में महत्वूपर्ण भूमिका निभागती है।