*39 वाँ सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव-2026*
*फरीदाबाद, 02 फरवरी।*39वें अंतर्राष्ट्रीय आत्मनिर्भर सूरजकुंड शिल्प मेले में नाबार्ड द्वारा शिल्पकारों और कारीगरों को अपने उत्पादों और हुनर को प्रदर्शित करने का अवसर दिया जा रहा है। इस वर्ष नाबार्ड को स्टाल नंबर 700 से 730 तक आवंटित किए गए हैं, जहां देश के विभिन्न राज्यों से आए शिल्पकार अपने पारंपरिक उत्पादों का प्रदर्शन कर रहे हैं। जिन पर देश व प्रदेश के पर्यटक खरीददारी कर रहे है।
स्टाल नंबर 708 पर हिमाचल से आए शिल्पकार मनोज कुमार अपने पारंपरिक और औषधीय उत्पादों की बिक्री कर रहे हैं। मनोज कुमार ने बताया कि वे पिछले दस वर्षों से सूरजकुंड मेले में लगातार स्टाल लगाते आ रहे हैं और मेले के माध्यम से अपने उत्पादों को देश व विदशों के ग्राहकों तक पहुंचाने का अवसर प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनके पास पहाड़ी हल्दी, काला जीरा, पहाड़ी लहुशन जैसे प्राकृतिक और औषधीय उत्पाद उपलब्ध हैं, जो बीपी और कोलेस्ट्रॉल जैसी बीमारियों को नियंत्रित करने में सहायक माने जाते हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि पहाड़ी हल्दी को पूरी तरह तैयार होने में लगभग तीन वर्ष का समय लगता है। उन्होंने बताया कि उनके उत्पाद बाजार दर की तुलना में बेहतर गुणवत्ता के साथ सस्ते उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
मनोज कुमार ने बताया कि सूरजकुंड मेला न केवल शिल्पकारों को अपनी कला और उत्पादों को प्रदर्शित करने का मंच प्रदान कर रहा है, बल्कि ग्रामीण और पारंपरिक कारीगरों की आर्थिक मजबूती और आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा दे रहा है।
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