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Saturday, 7 February 2026

2047 तक विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की निर्णायक भूमिका” : जे.पी. नड्डा

2047 तक विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की निर्णायक भूमिका” : जे.पी. नड्डा



*- 2,150 विद्यार्थियों को प्रदान की डिग्रियाँ*

फरीदाबाद, 7 फरवरी। 
भारत सरकार में स्वास्थ्य एवं परिवहन कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने मानव रचना शिक्षण संस्थान में दीक्षान्त समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत कर सभी डिग्रीधारकों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए उनके परिश्रम, अनुशासन और निरंतर मेहनत का परिणाम बताया। मानव रचना विश्वविद्यालय में आयोजित भव्य दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों, अभिभावकों एवं शिक्षकों की गरिमामयी उपस्थिति के बीच स्नातक एवं परास्नातक के 2150 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। कार्यक्रम में उपायुक्त आयुष सिन्हा, फरीदाबाद एसडीएम अमित कुमार, विश्व विद्यालय की चीफ पैटर्न सत्या भल्ला, कुलाधिपति डॉ प्रशांत भल्ला और उपाध्यक्ष डॉ अमित भल्ला भी मौजूद रहे।

केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि शिक्षा संस्थानों में विद्यार्थी शैक्षणिक ज्ञान नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों से युक्त व्यक्तित्व के निर्माण पर बल दिया जाता है। आज आप ऐसे समय में समाज में प्रवेश कर रहे हैं जब देश अमृत काल के दूसरे चरण में है और आने वाले 25 वर्ष आपकी भूमिका से तय होंगे। यह अवसर जितना बड़ा है, उतनी ही बड़ी जिम्मेदारी भी है, क्योंकि 2047 तक हमें मिलकर एक विकसित भारत का निर्माण करना है। इस यात्रा में स्वास्थ्य, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, उद्यमिता और नवाचार की अहम भूमिका होगी और मुझे विश्वास है कि आज की युवा पीढ़ी इस दायित्व को पूरी निष्ठा से निभाएगी।”

भारत में स्वास्थ्य क्षेत्र और राष्ट्रीय विकास की प्रगति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “पिछले 11 वर्षों में भारत ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार किया है। संस्थागत प्रसव 78 प्रतिशत से बढ़कर 89 प्रतिशत हो गए हैं, जबकि मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में गिरावट वैश्विक औसत की तुलना में लगभग तीन गुना तेज़ रही है। तपेदिक और मलेरिया जैसी बीमारियों में भी भारत की प्रगति वैश्विक प्रवृत्तियों से बेहतर रही है। लोगों पर पड़ने वाला स्वास्थ्य खर्च 62 प्रतिशत से घटकर 39.4 प्रतिशत रह गया है, जिससे आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाएं अधिक सुलभ और किफायती बनी हैं। इसी अवधि में देश में स्वास्थ्य एवं उच्च शिक्षा अवसंरचना का भी विस्तार हुआ है, जहां एम्स की संख्या 6 से बढ़कर 23, आईआईटी 33 और आईआईएम 20 से अधिक हो गए हैं। ये संस्थान उन्नत विनिर्माण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल तकनीक, हरित ऊर्जा, जैव प्रौद्योगिकी और उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में नए अवसर सृजित कर रहे हैं। लेकिन परिवर्तन स्वयं नहीं आएगा, इसका नेतृत्व आपको करना होगा।