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Tuesday, 10 February 2026

श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय में एआई कॉन्क्लेव 2026 आयोजित

श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय में एआई कॉन्क्लेव 2026 आयोजित


राष्ट्रीय क्षमता निर्माण में एआई की क्रांतिकारी भूमिका-प्रोफेसर दिनेश कुमार 



गुरुग्राम। श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर दिनेश कुमार ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उच्च शिक्षा को और अधिक नवाचारी और रोजगारपरक बनाएगा। एआई बहुत शक्तिशाली होता जा रहा है। राष्ट्रीय क्षमता निर्माण में भी एआई की क्रांतिकारी भूमिका है। वह मंगलवार को गुरुग्राम स्थित विश्वविद्यालय के ट्रांजिट कैंपस में एआई कॉन्क्लेव 2026 का उद्घाटन करते हुए बोल रहे थे। इस कॉनक्लेव में इंडस्ट्री से कई एआई एक्सपर्ट ने हिस्सा लिया। श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के अतिरिक्त गुरुग्राम और पलवल के विभिन्न स्कूलों के 150 से भी अधिक विद्यार्थी इसमें सम्मिलित हुए। विद्यार्थियों के एआई आधारित स्मार्ट प्रोजेक्ट इस कॉन्क्लेव में मुख्य आकर्षण रहे। 
यह कार्यक्रम भारत एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के अंतर्गत राष्ट्रीय पहल “एआई फॉर आत्मनिर्भर भारत: एचईआई प्री-समीट एंगेजमेंट्स” का हिस्सा है, जिसका नेतृत्व शिक्षा मंत्रालय की इनोवेशन सेल एवं एएआईसीटीई द्वारा किया जा रहा है।
कॉन्क्लेव का उद्देश्य एआई जागरूकता, बुनियादी कौशल, जिम्मेदार उपयोग और नवाचार को बढ़ावा देना है। साथ ही छात्रों एवं शोधकर्ताओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में उभरते अकादमिक एवं करियर मार्गों के लिए तैयार करना है।
मुख्य अतिथि के रूप में कुलगुरु प्रोफेसर दिनेश कुमार ने कहा कि एआई के कारण भविष्य में रोल और स्किल सेट तेजी से बदलने वाले हैं। एआई के सदुपयोग से बड़ा बदलाव आने जा रहा है। कुलगुरु प्रोफेसर दिनेश कुमार ने कहा कि डिजाइनिंग से लेकर फैब्रिकेशन तक भारत आत्मनिर्भर बनने जा रहा है। 
कंप्यूटर साइंस एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट की चेयरपर्सन प्रोफेसर ऊषा बत्रा ने शोध एवं अकादमिक लेखन में एआई की भूमिका पर गहन व्याख्यान दिया। न्यूरोवेंत्रा टेक्नोलॉजीज के सह संस्थापक एवं निदेशक वेंकटेश भारती ने वास्तविक जीवन में प्रभाव डालने वाले एल्गोरिदम की बारीकियां समझाईं। ओरेकल एआई क्लाउड सॉल्यूशंस की एसोसिएट डायरेक्टर ज्योति कटारिया ने जेनरेटिव एआई सर्विसेज की दुनिया के विविध आयामों पर व्याख्यान दिया। वहीं विप्रो के टेक्निकल लीड प्रणव कुमार ने डेटा से निर्णय तक की पूरी यात्रा पर प्रकाश डाला। 
इस अवसर पर ट्रांजिट कैंपस की निदेशक प्रोफेसर सुजाता शाही, इरा की निदेशक चंचल भारद्वाज, प्रोफेसर जॉय कुरियाकोज़े, डॉ. मोनिका जांगड़ा, डॉ. गुरप्रीत कौर, डॉ. शिव कुमार। अनु चौधरी, माधुरी, नीरज कुमार, एवं सोनल गर्ग उपस्थित थे।

Saturday, 7 February 2026

2047 तक विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की निर्णायक भूमिका” : जे.पी. नड्डा

2047 तक विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की निर्णायक भूमिका” : जे.पी. नड्डा



*- 2,150 विद्यार्थियों को प्रदान की डिग्रियाँ*

फरीदाबाद, 7 फरवरी। 
भारत सरकार में स्वास्थ्य एवं परिवहन कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने मानव रचना शिक्षण संस्थान में दीक्षान्त समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत कर सभी डिग्रीधारकों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए उनके परिश्रम, अनुशासन और निरंतर मेहनत का परिणाम बताया। मानव रचना विश्वविद्यालय में आयोजित भव्य दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों, अभिभावकों एवं शिक्षकों की गरिमामयी उपस्थिति के बीच स्नातक एवं परास्नातक के 2150 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। कार्यक्रम में उपायुक्त आयुष सिन्हा, फरीदाबाद एसडीएम अमित कुमार, विश्व विद्यालय की चीफ पैटर्न सत्या भल्ला, कुलाधिपति डॉ प्रशांत भल्ला और उपाध्यक्ष डॉ अमित भल्ला भी मौजूद रहे।

केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि शिक्षा संस्थानों में विद्यार्थी शैक्षणिक ज्ञान नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों से युक्त व्यक्तित्व के निर्माण पर बल दिया जाता है। आज आप ऐसे समय में समाज में प्रवेश कर रहे हैं जब देश अमृत काल के दूसरे चरण में है और आने वाले 25 वर्ष आपकी भूमिका से तय होंगे। यह अवसर जितना बड़ा है, उतनी ही बड़ी जिम्मेदारी भी है, क्योंकि 2047 तक हमें मिलकर एक विकसित भारत का निर्माण करना है। इस यात्रा में स्वास्थ्य, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, उद्यमिता और नवाचार की अहम भूमिका होगी और मुझे विश्वास है कि आज की युवा पीढ़ी इस दायित्व को पूरी निष्ठा से निभाएगी।”

भारत में स्वास्थ्य क्षेत्र और राष्ट्रीय विकास की प्रगति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “पिछले 11 वर्षों में भारत ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार किया है। संस्थागत प्रसव 78 प्रतिशत से बढ़कर 89 प्रतिशत हो गए हैं, जबकि मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में गिरावट वैश्विक औसत की तुलना में लगभग तीन गुना तेज़ रही है। तपेदिक और मलेरिया जैसी बीमारियों में भी भारत की प्रगति वैश्विक प्रवृत्तियों से बेहतर रही है। लोगों पर पड़ने वाला स्वास्थ्य खर्च 62 प्रतिशत से घटकर 39.4 प्रतिशत रह गया है, जिससे आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाएं अधिक सुलभ और किफायती बनी हैं। इसी अवधि में देश में स्वास्थ्य एवं उच्च शिक्षा अवसंरचना का भी विस्तार हुआ है, जहां एम्स की संख्या 6 से बढ़कर 23, आईआईटी 33 और आईआईएम 20 से अधिक हो गए हैं। ये संस्थान उन्नत विनिर्माण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल तकनीक, हरित ऊर्जा, जैव प्रौद्योगिकी और उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में नए अवसर सृजित कर रहे हैं। लेकिन परिवर्तन स्वयं नहीं आएगा, इसका नेतृत्व आपको करना होगा।